बेतवा और पर्यावरण से हो रहे खिलवाड़ पर पारीछा थर्मल प्लांट कुछ संजीदा हुआ है। जिम्मेदारी का एहसास होने पर प्लांट के भर चुके एश (राख) डैम को खाली करने के लिए प्लांट प्रशासन ने नेशनल हाईवे से करार कर लिया है। छतरपुर में अक्तूबर से शुरू होने वाले फोर लेन कार्य के लिए प्लांट प्रशासन खुद के खर्चे पर राख पहुंचाने का काम करेगा। इसके अलावा सीमेंट के एपेक्स बनाने वाली कंपनियों से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण की योजना फेल होने के बाद प्लांट प्रशासन ने यह कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
पारीछा थर्मल पावर प्लांट के एश डैम भरने से कोयले की राख से बगल से गुजरने वाली बेतवा नदी में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। अमर उजाला इस समस्या को खबरों के माध्यम से लगातार उठा रहा है। प्लांट प्रशासन ने इस चुनौती से निपटने के लिए राख के नए बांध बनाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए प्लांट से सटे ग्राम गुलारा, महेबा व मुराटा की 572 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जानी थी। मगर, पर्यावरण विभाग के मंजूरी देने से इंकार करने पर योजना फेल हो गई।
प्लांट प्रशासन ने अब राख को ठिकाने लगाने के लिए विकल्प तलाशना शुरू कर दिए हैं। पिछले दिनों प्लांट अधिकारियों की एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर से हुई वार्ता में राख लेने पर सहमति बनी। सहमति के अनुसार अक्तूबर से छतरपुर के पास फोरलेन निर्माण का काम शुरू होने जा रहा है, जिसमें प्लांट प्रशासन अपने खर्चे पर राख को मौके पर पहुंचाने का काम करेगा। खदानों को भरने, इंटरलाकिंग टाइल्स और एपेक्स बनाने वाली कंपनियों से भी राख लेने के लिए संपर्क किया जा रहा है।
राख का भंडारण कर रहे कम
अब राख के भंडारण को कम करके काम चलाया जाएगा। एनएचएआई ने राख लेने पर सहमति दी है। अभी डायमंड सीमेंट समेत 17 फैक्ट्रियों को निशुल्क राख दी जा रही है। प्लांट से बेतवा नदी में बिलकुल राख नहीं जा रही है। जो कमियां थीं, उनको पहले ही दूर किया जा चुका है। नदी के पानी में जो पुरानी राख है वह भी मुहाने पर पड़ी है। उसको हटवाने का भी काम चल रहा है।
ज्ञान प्रकाश वर्मा, मुख्य महाप्रबंधक पारीछा थर्मल पावर प्लांट।
यह है एश डैम की क्षमता
प्लांट में 110 की दो, 210 की दो और 250 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित हैं। राख के भंडारण के लिए पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 110 मेगावाट और 210 मेगावाट के दो- दो राख के बांध बने हैं। पारीछा थर्मल पावर प्लांट में चार एश डैम बने हैं। प्रत्येक डैम की क्षमता 50 लाख टन की है। हर महीने पांच से छह लाख टन राख प्लांट से निकलती है।
मुफ्त में उपलब्ध है प्लांट की राख
पारीछा पावर प्लांट में निकली राख मुफ्त में उपलब्ध है। इससे ईंट, एपेक्स और सजावटी सामान बनाकर पैसा कमा सकते हैं। प्लांट के विशेषज्ञ अधिकारियों का दावा है कि इस राख का जैविक खाद के साथ उपयोग करके कृषि उपज बढ़ाई जा सकती है। राख की मात्रा बढ़ने की समस्या से निपटने के लिए अब प्लांट प्रशासन ने निशुल्क राख देकर उसके इस्तेमाल पर जोर देना शुरू कर दिया है।
ये हैं सरकारी आदेश
- सभी अभिकरण, व्यक्ति या संगठन निचले क्षेत्रों के भूमि भराव कोयला की राख से करेंगे।
- कोई भी व्यक्ति मिट्टी के ईंटों का निर्माण कम से कम 50 प्रतिशत कोयला राख के बिना नहीं करेगा।
- सड़कों, फ्लाईओवर पुलों के निर्माण में सभी संस्थाएं कोयला राख का उपयोग करेंगी।
- मनरेगा, पीएमजीएसवाई, अर्बन रूरल हाउसिंग, स्वच्छ भारत अभियान और अन्य संचालित निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश आधारित उत्पादों का प्रयोग अनिवार्य है।