केस-1
मां के बैंक अकाउंट से खर्च कर दिए 50 हजार
लहरगिर्द का रहने वाला 11वीं का छात्र ऑनलाइन मोबाइल गेमिंग का लती हो गया। वह व्यायाम करने की बात कहते हुए घर से पार्क निकल जाता और वहां बैठकर तीन-तीन घंटे मोबाइल पर गेम खेलकर पैसे लगाता रहता। उसके पास मां के बैंक खाते की पूरी जानकारी थी। मां के फोन से ही खेलता था और ओटीपी आने पर डिलीट (हटा) कर देता था। धीरे-धीरे वह 50 हजार रुपये हार गया। जानकारी होने पर जब मां ने उसे डांटा तो हाथ की नस काट ली। मां उसे मनोचिकित्सक के पास काउंसलिंग के लिए लेकर आई।
केस-2
लॉटरी में पैसा हारा तो गिरवी रख दिए पत्नी के जेवर
झांसी का एक युवक नशे का आदी था। वह मोबाइल पर ऑनलाइन लॉटरी में भी खूब पैसे लगाता था। धीरे-धीरे वह तीन-चार लाख रुपये हार गया। इसके बावजूद लत ऐसी लगी थी कि वो और पैसे लगाना चाहता था। जब पैसे नहीं बचे तो उसने पत्नी के जेवर गिरवी रख दिए। जबकि, उसकी एक साल पहले ही शादी हुई थी। पत्नी को जेवर नहीं मिले तो उसने पुलिस में शिकायत करने के धमकी दी। इस पर युवक ने सबकुछ कबूल दिया। नशे की लत छुड़ाने के लिए पत्नी उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर आई।
केस-3
सट्टेबाजी के शौक में ऑफिस से पैसे तक चुरा लिए
झांसी का रहने वाला एक युवक दूसरे राज्य में कर्मचारी है। कुछ महीने पहले उसे कार्यालय से पैसे चोरी करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। घर लौट आया तो उसके मन में आत्महत्या के विचार आने लगे। बुजुर्ग पिता उसे लेकर मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने उसकी काउंसलिंग शुरू की तो वह पैसे चुराने के लगे आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा। हालांकि, ये भी कहता रहा कि वह ऑनलाइन सट्टा खेलता है। उसके मन में आत्महत्या जैसे ख्याल न आए, इसके लिए डॉक्टर ने उसकी दवा शुरू की।
इन कारणों से बिगड़ जाते
- बच्चों की परवरिश पर परिजनों का ध्यान न होना।
- शुरू से बच्चे का बुरी संगत में पड़ जाना।
- नशे की लत लग जाना।
इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चों को एटीएम, नेट बैंकिंग आदि का पासवर्ड न बताएं।
- पॉकेट मनी दें, तो उसका हिसाब-किताब पूछें।
- कोई दोस्त सट्टेबाजी, शराब पीने वाला हो तो उससे दूर करें।