झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में मृतका के पति, ससुर व देवर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि सास को सात साल के कठोर कारावास से दंडित किया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मध्य प्रदेश के निवाड़ी निवासी लालाराम कुशवाहा की पुत्री ललिता देवी की शादी 17 फरवरी 2012 को बरुआसागर के फुटेरा निवासी हरीराम के पुत्र घनश्याम के साथ हुई थी। लालाराम ने शादी में हैसियत के अनुसार दहेज दिया था। इसके बावजूद दहेज की मांग को लेकर ललिता को शादी के बाद से ही प्रताड़ित किया जाने लगा। 31 मई 2012 को लालाराम को पुत्री के मरने की सूचना मिली।
इस पर वह अन्य परिजनों के साथ फुटेरा पहुंचा। वहां जाकर देखा कि ललिता के गले में प्लास्टिक की डोरी का फंदा फंसा है तथा डोरी खपरैल की करी से लटकी है। लालाराम ने घटना की तहरीर बरुआसागर थाने में दी, जिसमें उसने ससुरालियों पर पुत्री की हत्या का आरोप लगाया।
अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद पति हरीराम कुशवाहा, ससुर घनश्याम कुशवाहा व देवर नारू उर्फ नारायण दास को धारा 304 बी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि, सास केशर देवी को सात साल के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया। इसके अलावा उक्त चारों को धारा 498 ए के अंतर्गत तीन-तीन साल के कठोर कारावास तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 के तहत दो-दो साल के कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शारिक इकबाल ने की।