झांसी। अपने पिता की तरह हुकुमेंद्र की भी सेना में भर्ती होकर देशसेवा करने की चाहत थी। इसके लिए वह दिन-रात तैयारी में जुटा हुआ था। रोज दौड़ने से लेकर परीक्षा के लिए भी वह तैयारी कर रहा था। हाल ही में उसने सेना से जुड़ी परीक्षा भी दी थी। उसने अपने इस सपने की जानकारी कॉलेज के शिक्षकों को भी बताई थी।
कॉलेज की शिक्षिका ने बताया कि हुकुमेंद्र पढ़ने में अच्छा विद्यार्थी था। आज तक उसका कभी किसी से विवाद नहीं हुआ। उसने अपने भविष्य की राह भी चुन ली थी। वह अपने पिता की तरह ही सेना में भर्ती होना चाहता था। इसीलिए उसने एनसीसी भी ज्वाइन की थी। सेना भर्ती में पास होने के लिए वह खुद को तैयार भी कर रहा था। दौड़ की नियमित अभ्यास भी करता था। इसके अलावा परीक्षा पास करने के लिए नोट्स भी तैयार कर रहा था। वह शिक्षकों से भी सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने की बात कहता रहता था। उसकी लगनशीलता देखकर शिक्षकों को भी लगता था कि वह कभी न कभी अपना लक्ष्य हासिल कर लेगा। मगर मौत के साथ ही उसका यह सपना भी दफन हो गया।