झांसी में आम आदमी को कदम-कदम पर भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। सरकारी दफ्तरों में लोगों के ज्यादातर काम बगैर लेन-देन के नहीं हो पाते हैं। इससे लोग आजिज आ चुके हैं, बावजूद भ्रष्टाचार की शिकायत करने से कतराते हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) व उप्र सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के दफ्तरों में बुंदेलखंड के 7 जिलों से पिछले एक साल में महज 13 शिकायतें ही आम लोगों की ओर से पहुंची हैं।
जिस तरह के मामले सामने आते हैं उससे साफ है कि सरकारी तंत्र में हर काम के दाम तय हैं। जन्म प्रमाण पत्र से लेकर मृत्यु प्रमाण तक बनवाने के लिए लोगों को सुविधा शुल्क देना पड़ता है। यहां तक कि अपनी जाति का प्रमाण हासिल करने के लिए भी लोगों को जेब हल्की करनी पड़ जाती है। बगैर ‘वजन’ के फाइलें आगे सरकती तक नहीं हैं। घूसखोरी सिस्टम का हिस्सा बन चुकी हैं। इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ता है। बावजूद, शिकायत करने के लिए कोई आगे नहीं आता है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के पास बुंदेलखंड के सातों जनपदों से भ्रष्टाचार की पिछले एक साल में महज सात शिकायतें आईं। कमोबेश उप्र सतर्कता अधिष्ठान की भी यही स्थिति है। यहां भी लोगों की तरफ से साल भर में भ्रष्टाचार की महज छह शिकायतें ही मिली हैं। जबकि, दोनों ही संस्थानों में शिकायत करना बेहद आसान है।
यहां इस तरह की जा सकती है शिकायत
भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) का ऑफिस नंदनपुरा में पहूज के पास स्थित है। यहां कोई भी व्यक्ति किसी भी अराजपत्रित सरकारी कर्मचारी की शिकायत दर्ज कर सकता है। इसके लिए जरूरी है कि संबंधित कर्मचारी के पास शिकायतकर्ता का कोई काम लंबित हो। यहां प्रार्थना पत्र के साथ काम से संबंधित साक्ष्य भी देने होते हैं। शिकायत की जांच करने के बाद महज एक सप्ताह के भीतर एंटी करप्शन की टीम द्वारा घेराबंदी कर भ्रष्ट कर्मचारी को दबोच लेती है। जबकि, विजिलेंस के पास कोई भी व्यक्ति किसी भी सरकारी अधिकारी व कर्मचारी तथा जनप्रतिनिधि के भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर पहुंच सकता है। शिकायत के परीक्षण के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी जाती है। शासन के निर्देश मिलती ही शिकायत शुरू कर दी जाती है। विजिलेंस का ऑफिस जिला पंचायत के पास स्थित है।
कोई भी व्यक्ति किसी भी सरकारी कर्मचारी /अधिकारी व जनप्रतिनिधि के भ्रष्टाचार की शिकायत महज आवेदन के जरिये दर्ज करा सकता है। विभाग द्वारा शिकायत का परीक्षण करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी जाती है। शासन के निर्देश पर जांच शुरू कर दी जाती है। इसमें शिकायतकर्ता को किसी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता है।
आलोक कुमार शर्मा, एसपी- एसपी विजिलेंस
बुंदेलखंड के इन जिलों से पहुंची शिकायतें
झांसी-4
ललितपुर-1
बांदा-2
जालौन-1
चित्रकूट-1
महोबा-2
हमीरपुर-2