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नाले पर मकान, दुकान और स्कूल

Sun, 09 Jul 2017 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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kavvja, jhansi news - फोटो : amar ujala
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झांसी। महानगर के ज्यादातर नालों पर लोगों ने अतिक्रमण कर मकान, दुकान और स्कूल बनवा लिए हैं। इससे कई जगह नालों का स्वरूप भी बिगड़ गया है। इस वजह से तय समय पर इनकी सफाई भी नहीं हो पाई है। कब्जे वाली जगह पर सफाई न होने पर हल्की बारिश में यहां का कचरा बहकर नालों को चोक कर देता है। कुछ दिन पहले नगर आयुुक्त प्रताप सिंह भदौरिया ने विभिन्न नालों का निरीक्षण किया तो अवैध कब्जों की हकीकत सामने आई। उन्होंने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सोमवार दस जुलाई से अभियान शुरू होगा।
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शहर में एक मीटर से छोटे 162 नाले हैं तथा एक मीटर से चौड़े 42 नाले हैं। इनकी सफाई 15 जुलाई तक पूरी करने का समय तय है। ज्यादातर नालों की सफाई हो गई है, लेकिन जो स्थिति है उससे लगता नहीं कि नाले साफ हुए हैं, क्योंकि पानी बरसने से नालों में फंसा कचरा चोक हो जाता है और आसपास जलभराव हो जाता है। स्थिति यह है कि नालों पर जबरदस्त अतिक्रमण है। किसी ने शौचालय बना लिया तो किसी ने दरवाजे के बाहर बैठने के लिए चबूतरा बना लिया, किसी ने नाले पर स्लैब डालकर पक्का निर्माण कर लिया तो किसी ने स्कूल बना लिया है। अवैध कब्जों की वजह से सफाई नहीं हो पा रही है, जिससे पानी बरसने से आसपास के क्षेत्रों में जलभराव हो रहा है।

अतिक्रमण की समस्या पुराने नालों पर अधिक है। इसमें छनियापुरा का नाला, नटबली, मलगढ़ा, मेंहदी बाग, बाहर दतिया गेट स्थित ईदगाह का नाला, पठौरिया, अलीगोल खिड़की, शिवाजी नगर, कसाई मंडी और सैंयर गेट का नाले ऐसे हैं, जो पुराने शहर से निकलते हैं, वर्षों पुराने इन नालों पर इतना अतिक्रमण है, कि इनकी सफाई नहीं हो पाती है। इतना ही नहीं, अवैध कब्जा करने वालों ने इन नालों का स्वरूप बिगाड़ दिया है, कहीं पर नाला आठ फिट चौड़ा है तो वहीं नाला आगे चलकर दो से तीन फुट चौड़ा बचता है।
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शिवाजी नगर में नाले पर कब्जा
शिवाजी नगर में अंबा भवन के पास से निकले नाले पर अवैध कब्जा है। इस नाले के ऊपर स्लैब डाल दी गई है। नाला एक स्कूल के नीचे से गुजरता है। यहां पर इतना अधिक अतिक्रमण है कि नाले की सफाई तो दूर नाले के अंदर जा पाना संभव नहीं है।

सफाई कर्मी डाल रहे नालों में कचरा
शहर में जगह-जगह बने कचरा घरों पर अवैध कब्जा हो गया है, जिससे कचरा घर समाप्त हो गए हैं। सफाई कर्मियों को कचरा डालने के लिए जगह ही नहीं मिल रही है, जिससे वह कचरा इकट्ठा करके आसपास के नालों में डाल रहे हैं। इस ओर विभाग का ध्यान नहीं है। दरअसल, नालों में कचरा डालने के पीछे डीजल चोरी का खेल चल रहा है। डंपर, प्लेसर और अन्य कचरा गाड़ियों को डीजल की पर्ची जारी की जाती है कि कचरा उठाकर पंचवटी स्थिति खंती पर कचरा डाला जा सके, लेकिन ड्राइवरों और सफाई कर्मियों की मिलीभगत से कचरा नाले में डाल दिया जाता है और डीजल का पैसा जेब में चला जाता है।

इन नालों पर भी हैं अवैध कब्जे
- अजस एंक्लेव का नाला पूरी तरह से अवैध कब्जे की चपेट में है। महापौर ने इस नाले को तोड़कर फिर से बनाने का निर्देश दिया था। इसका एस्टीमेट बन गया है। अब नाले को तोड़ा जाएगा।
- छनियापुरा का नाला भी अवैध कब्जे की चपेट में है। सुभाषगंज से निकले इस नाले पर कई लोगों ने मकान बना लिए हैं। किसी से शौचालय तो किसी ने बैठने के लिए स्थान बना लिया है। पूरा नाला अतिक्रमण की चपेट में है।
- तालपुरा का मलगढ़ा नाला भी अतिक्रमण के कब्जे में है। इस नाले के ऊपर एक कालोनाइजर ने पक्का निर्माण करा लिया है, जिससे इस नाले की सफाई नहीं हो पा रही है। अब इस नाले के ऊपर बने अवैध कब्जा को तोड़ा जाएगा।
- नटबली का नाला भी अतिक्रमण से बचा नहीं है। मेवातीपुरा में इस नाले पर एक कोटेदार ने एक तरफ शौचालय तो दूसरी तरफ बैठने का स्थान बना लिया है। इस नाले पर कई स्थानों पर शौचालय बने हैं।
- मेंहदी बाग, थापकबाग और खूजर बाग से निकले नाले भी अतिक्रमण का शिकार हैं। इस कारण बरसात में इन मुहल्लों के लोगों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है।
- गल्ला मंडी रोड पर कैलाश रेजीडेंसी के सामने से निकला नाला कवर्ड है, जिस कारण उसकी सफाई नहीं हो पा रही है।
- सैंयरगेट का नाला भी अतिक्रमण की चपेट में है। यदि कोई सफाई कर्मचारी नाला की सफाई की बात करता है तो अतिक्रमण कारी उसे बोलने नहीं देते हैं और धमकाते हैं, जिससे सफाई कर्मी चुप्पी साधे रहते हैं।


वर्जन
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अवैध कब्जों पर लाल निशान लगाया
जिन नालों पर अतिक्रमण है, उन्हें हटाने के लिए लाल निशान लगा दिया गया है। सोमवार 10 जुलाई से अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। नालों पर जहां भी अवैध कब्जा होगा, उसे हटाया जाएगा। अभियान 15 जुलाई तक लगातार चलेगा। जरूरत पड़ी तो अभियान को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
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- डॉ. राकेश बाबू, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
 
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