झांसी। सन् 1965 में भारत-पाक युद्ध में शहीद सैनिकों की याद में शनिवार को वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की धरती पर वीर सैनिकों का सम्मान किया जाएगा। महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल में आयोजित शौर्यांजलि कार्यक्रम में दोपहर 12 बजे से 1965 के वीर योद्धा ब्रिगेडियर अरविंद सिंह, ब्रिगेडियर कंवलजीत सिंह, मेजर जनरल बीआर वर्मा को सम्मानित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर अमर उजाला है।
1965 के युद्ध में शहीद हुए वीरों की याद में देशभर में मनाई जा रही स्वर्ण जयंती के परिप्रेक्ष्य में आयोजित शौर्यांजलि कार्यक्रम में जन साधारण, विद्यार्थी, प्रबुद्ध वर्ग अपने देश के सैन्य योद्धाओं से रूबरु होंगे। कार्यक्रम के आयोजक हंसराज मॉडर्न स्कूल की चेयरपर्सन अनु मिश्रा ने बताया कि स्कूल परिसर में आयोजित शौर्यांजलि कार्यक्रम में कॉमन वेल्थ प्रेस क्वार्टर ली रोल्स रायक अवार्ड से सम्मानित व ‘1965 द्वितीय भारत-पाक युद्ध’ पुस्तक की लेखिका रचना बिष्ट रावत भी मौजूद रहेंगी। इनकी प्रथम रचना ‘द ब्रेव परमवीर चक्र स्टोरीज’ है। मैनेजर गौरव मिश्रा ने बताया कि विद्यार्थी 1965 के युद्ध के सितारों से बातचीत कर उनसे सैन्य जीवन से जुडे़ सवाल भी कर सकेंगे। कार्यक्रम में चेयरमैन नीरज खत्री एवं प्रधानाचार्य एस रिजवी भी मौजूद रहेंगी।
1965 के युद्ध के हीरो
पाकिस्तान के सिंध में जन्मे ब्रिगेडियर अरविंद सिंह का परिवार विभाजन के पश्चात लुधियाना में बस गया था। एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पैराशूट रेजीमेंट एवं कमांडो यूनिट में चयनित हुए ब्रिगेडियर अरविंद सिंह ने 65 के युद्ध में पाकिस्तान के सैनिकों से हाजी पीर में ऐतिहासिक जंग लड़ी। इसके अलावा उन्होंने इराक, सीरिया, जॉर्डन आदि देशों से संबद्ध गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। वहीं, देश में राष्ट्रीय रायफल ऑपरेशन में इनका विशिष्ट योगदान रहा।
फिरोजपुर पंजाब में जन्मे ब्रिगेडियर कंवलजीत सिंह ने युद्ध में अपनी टुकड़ी का अतुलनीय नेतृत्व किया तथा बर्की में विजय प्राप्त की।
उन्होंने सिख रेजीमेंट सेंटर, और टीए ग्रुप को भी कमांड किया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने युद्ध से जुड़ी दो पुस्तकें ‘एशज टू ग्लोरी सारागही बटालियन’ एवं ‘एज इट हैप्पिंड अमेजिंग टैलटेंल्स आफ आर्मी लाइफ’ लिखीं।
वर्ष 1959 में कमीशन प्राप्त मेजर जनरल बीआर वर्मा ने सन 1962, 65 एवं 71 के युद्धों में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने नेपाल व आसाम में सेना के आपरेशनों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेवानिवृत्ति के पश्चात सीबीएसई द्वारा संचालित विद्यालय की स्थापना कर बच्चों को शैक्षिक व सेना की उपलब्धियों से जोड़ रहे हैं।