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स्टेडियम में बनेगा हॉकी छात्रावास

Tue, 12 Apr 2016 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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hockey, jhansi hindi news - फोटो : demo
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झांसी। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की कर्मभूमि में जल्द ही राष्ट्रीय खेल हॉकी की गतिविधियां जोर पकडे़ंगी। खेल निदेशालय ने स्टेडियम में हॉकी खिलाड़ियों के लिए छात्रावास स्थापित करने की योजना बनाई है, जो अंतिम चरण में है। वहीं, ध्यानचंद स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ का निर्माण अंतिम चरण में है।
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उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फलक पर हॉकी खेल में जनपद से मेजर ध्यानचंद के अलावा लगभग एक दर्जन से ज्यादा खिलाड़ी समय-समय पर उभरे हैं। वहीं, एस्ट्रोटर्फ  की कमी, सरकारी संसाधनों का अभाव तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेल में आए नियमों के परिवर्तनों के चलते तमाम प्रतिभावान खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ सके, जिसके वह हकदार थे।

ऐसे में खिलाड़ियों व हॉकी प्रेमियों की मांग पर स्टेडियम में शासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मानक का एस्ट्रोटर्फ तैयार किया जा रहा है। ताकि सभी खिलाड़ी एस्ट्रोटर्फ पर नियमित प्रैक्टिस कर सकें। इसी क्रम में खेल निदेशालय जनपद में हॉकी की गतिविधियों को जोर देने के लिए स्टेडियम में छात्रावास बनाने की योजना को अंतिम रूप दे रहा है।  
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इस संदर्भ में क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी रानी प्रकाश ने बताया कि वर्तमान खेल सत्र में हॉकी छात्रावास स्थापित करने की योजना है, जिसमें लगभग 35 खिलाड़ियों को प्रवेश दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि स्टेडियम में खेल विभाग द्वारा सिर्फ बॉक्सिंग का छात्रावास संचालित हैं, जिसमें बालक वर्ग में 15 खिलाड़ी बॉक्सिंग में दक्षता हासिल कर रहे हैं।  

नवोदितों को है उम्मीद, मिलेगा सीधा प्रवेश
लक्ष्मी व्यायाम मंदिर (एलवीएम) के खेल मैदान में हॉकी गोल पोस्ट पर अभ्यास कर रहे व केंद्रीय प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभाग कर लौटे दीपक कुशवाहा, सुनील कुशवाहा, शिव कुमार के मुताबिक हॉकी छात्रावास स्थापित होने पर उन्हें यहां सीधे प्रवेश का भी मौका मिल सकता है। वहीं, घास पर प्रैक्टिस करने की अपेक्षा अगर उन्हें एस्ट्रोटर्फ पर प्रैक्टिस करने का नियमित मौका मिलेगा तो उनके खेल में निखार आएगा।

हॉकी छात्रावास ने दिए थे कई खिलाड़ी
ध्यानचंद स्टेडियम में 80 एवं 90 के दशक में रहे हॉकी छात्रावास से कई दक्ष खिलाड़ियों ने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नेतृत्व किया, जिनमें संजय विष्ट, आतिफ इदरीश, गौरव आदि हैं। लेकिन एस्ट्रोटर्फ की कमी, संसाधनों के अभाव आदि क ारणों के चलते यह छात्रावास वर्ष 95 में अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया।
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