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एचएमपीवी : न लें तनाव, सतर्कता और सजगता से ही बचाव, बोले चिकित्सक

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। एचएमपीवी फेफड़ों और श्वसन तंत्र से जुड़ीं बीमारियां पैदा करने वाला वायरस है। यह इन्फ्लूएंजा के तरीके से ही फैलता है। इसमें बहती नाक, गले में खराश, खांसी और बुखार जैसे लक्षण होते हैं, जो आम सर्दी-जुकाम जैसे दिखते हैं। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने कहा कि इस वायरस से तनाव लेने की जरूरत नहीं है। सतर्कता और सजगता से बचाव संभव है।



चिकित्सकों ने कहा कि इस वायरस से बच्चे और बुजुर्ग ही नहीं, जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होगी, वह भी संक्रमित हो सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक से निकली छोटी बूंदों, दूषित सतहों को छूने या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इससे बचने के लिए हाथों को साबुन और पानी से बार-बार धोना जरूरी है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें, मास्क पहनें और बार-बार छुई जाने वाली सतहों को साफ करें। बीमार लोगों के पास जाने से बचें।
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चिकित्सकों का कहना है रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (आरएसवी) फैमिली का ही एचएमपीवी है। इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है। इसके प्रारंभिक लक्षण नाक बहना, खांसी, छींकना, बुखार आना आदि हैं। जब संक्रमण बढ़ता है तो निमोनिया होने से सांस लेने में दिक्कत होती है। ऑक्सीजन का स्तर भी गिरने लगता है। इसलिए कोविड की गाइड लाइन का पालन करने से बचाव संभव है। यह हवा के माध्यम से भी फैलता है, इसलिए मास्क लगाकर रहें और संक्रमित व्यक्ति से पर्याप्त दूरी जरूरी है। डायविटीज, कैंसर, हार्ट रोगी, एचआईवी आदि रोगियों को विशेष बचाव जरूरी है।



तीन से छह दिन में आते हैं लक्षण

डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमण के तीन से छह दिन के बीच में एचएमपीवी के लक्षण आते हैं। चूंकि इसका सिम्टोमैटिक (लक्षण के आधार पर) उपचार है, इसलिए कोई निर्धारित दवा नहीं है। यह व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करेगा कि कब इससे राहत मिलेगी।



आरटीपीसीआर की तरह होगी जांच



फिलहाल इसकी जांच की सुविधा झांसी में नहीं है। इसलिए संदिग्ध आने पर सैंपल जांच के लिए लखनऊ एसजीपीजीआई लखनऊ भेजा जाएगा। इसकी जांच का सैंपल आरटीपीसीआर की तरह लिया जाएगा।

ऐसे बरतें सतर्कता



भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें, मास्क लगाएं, पर्याप्त दूरी रखें, हाथ मिलाने से परहेज करें, समय-समय पर सेनिटाइजर से हाथ साफ करें। यदि किसी में इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण हैं तो तत्काल चिकित्सक को दिखाएं। अधिकारियों का दावा है कि मेडिकल कॉलेज व स्वास्थ्य विभाग के पास हर हालात से निपटने के पर्याप्त इंतजाम हैं। मेडिकल कॉलेज में तीन, पीएचसी बड़ागांव, समथर, गरौठा, रानीपुर व बरुआसागर में ऑक्सीजन के प्लांट लगे हुए हैं। सीएमओ डाॅ. सुधाकर पांडेय का कहना है कि गाइन लाइन आते ही उसका शत-प्रतिशत पालन कराया जाएगा।

0- ये कहना है चिकित्सकों का

एचएमपीवी रेस्पीरेट्री वायरस है, इसलिए कोविंड की तरह से फैलता है। व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता के आधार पर यह असर डालता है। इसलिए जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, उन्हें बचाव के हरंसभव प्रयास करने होंगे।



डाॅ. मधुर्मय शास्त्री, चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष मेडिकल कॉलेज

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मेडिकल कॉलेज में वायरस की जांच की सुविधा तो है मगर संदिग्ध एचएमपीवी का सैंपल लखनऊ जाएगा। शासन से गाइड लाइन आने के बाद ही जांच की सुविधा शुरू होगी। कॉलेज में सभी तैयारियां है। - डॉ. मयंक सिंह, प्रभारी प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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एचएमपीवी ड्रापलैट से फैलता है। रेस्पिरेटरी रेस्पीरेट्री ट्रैक प्रभावित करता है। इससे बचाव कोविड गाइड लाइन के पालन से संभव है। चूंकि बच्चों व बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए ज्यादा प्रभावित होते हैं।



डॉ. उत्सव राज, डिप्टी सीएमओ
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