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सांस्कृतिक विरासत के कारण दुनिया में फैली हिंदी

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रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में मनाए जारहे हिन्दी पखवाड़ी में बोलते कुलपति डा.
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सांस्कृतिक विरासत के कारण दुनिया में फैली हिंदी
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झांसी। हिंदी दिवस पर शनिवार को विभिन्न संस्थानों ने कार्यक्रम आयोजित कर हिंदी के दुनिया में बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। इस मौके पर हुए कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत के कारण ही हिंदी दुनिया में फैली।
शनिवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हिंदी संस्थान में हिंदी दिवस समारोह और सेवा सप्ताह के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि डा. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के हिंदी और संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि आज हिंदी पूरे विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा बन चुकी है। लचीली होने के नाते ही यह सर्वग्राह्य बनी। अपनी सांस्कृतिक विरासत और सौंदर्यबोध के कारण ही हिंदी पूरी दुनिया में फैली। इसकी प्रकृति साम्राज्यवादी नहीं वरन अति सहज और उदार है। 21वीं सदी में हिंदी ने अपनी खूबियों की वजह से पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में कर लिया है। उन्होंने हिंदी के प्रसार में इंटरनेट और सोशल मीडिया के योगदान को भी रेखांकित किया। विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल ने कहा कि हिंदी ने स्वतंत्रता के आंदोलन में भारतीय जनमानस को आपस में जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. जे.वी. वैशम्पायन ने की। कार्यक्रम में समाजकार्य विभाग के डा. यतींद्र मिश्र, शिल्पा मिश्रा, डा. कौशल त्रिपाठी, उमेश शुक्ल, डा. जितेंद्र बबेले, डा. श्वेता पाण्डेय. जयराम कुटार, डा. उमेश कुमार मौजूद रहे। संचालन डा. अचला पाण्डेय व आभार डा. पुनीत बिसारिया ने व्यक्त किया।
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रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में कुलपति डा. अरविंद कुमार ने कहा कि हिंदी देश के पचास प्रतिशत से अधिक लोगों की मातृभाषा है। हिंदी से ही देश का विकास संभव है। यह ग्रामीण व शहर में संवाद का सशक्त माध्यम है। कृषि अधिष्ठाता डा. एस के चतुर्वेदी ने कहा कि हिंदी सहज, सरल व बोधगम्य है। इस मौके पर निदेशक शिक्षा डा. अनिल कुमार, डा. अमित जैन, डा. अर्तिका कुशवाहा, डा. अंशुमान, डा. धनंजय उपाध्याय, डा. सौरभ सिंह, डा. एसके पांडे, डा. एआर शर्मा, डा. अनिल कुमार गुप्ता, डा. राकेश चौधरी ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में कुलसचिव डा. मुकेश कुमार श्रीवास्तव, वित्तनियंत्रक रमेश अग्रवाल आदि उपस्थित रहे। संचालन डा. प्रभात तिवारी ने किया।
भेल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कार्यपालक निदेशक डीके दीक्षित ने कहा कि भाषा केवल आपसी विचारों के आदान- प्रदान का माध्यम नहीं होती, अपितु संबंधित राष्ट्र व समाज का परिचायक भी होती है। इस अवसर पर महाप्रबंधक मुक्तिकांत खरे, महाप्रबंधक प्रविश वार्ष्णेय, नीलम इक्का, उपेंद्र कुमार मौजूद रहे। संचालन उप अधिकारी संजय मिश्र व उप महाप्रबंधक केके चौहान तथा डा. संतोष कुमार मिश्र ने आभार व्यक्त किया।
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आर्यकन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में छात्रा अंकिता, नैंसी, ज्योति ने विचार व्यक्त किए। बुंदेलखंड महाविद्यालय में आयोजित वाद विवाद प्रतियोगिता में लाखन सिंह, मुस्कान कनौजिया, सुशांत पटेल, देवेश दुबे, खुशी श्रीवास्तव, काजोल कुशवाहा, अंकिता भागवत, अंजू, उत्तरा राजपूत ने विचार व्यक्त किए। आरी स्थित श्री रावतपुरा सरकार कॉलेज में निर्देशक अमिता सक्सेना ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला। इसी तरह राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त महाविद्यालय चिरगांव में आयोजित कार्यक्रम में प्रबंधक डा. वैभव गुप्त, प्राचार्य डा. सुनील भटनागर, डा. अशोक मुस्तारिया, जन चेतना युवा समिति के कार्यक्रम में मुकेश सिंघल, राजेश शर्मा, राजतिलक सक्सेना, राजेंद्र रावत, वीरेंद्र कुमार शर्मा, नेहरू युवा केंद्र द्वारा आयोजित युवा गोष्ठी में उमेश, अवनीश वर्मा, जायेत फातिमा, नीलम कुशवाहा, संजना गंगोलिया, अंजलि कुमारी, रिचा यादव व कुलदीप सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में संस्थापक एनआर सिंह, अजय कुमार पटैरिया, कौशल किशोर, उमाचरण वर्मा, धीरज ने विचार व्यक्त किए। सामाजिक संस्था न्यू इंडिया फाउंडेशन एक पहल की अखिल भारतीय रचनात्मक हिंदी कहानी लेखन प्रतियोगिता में कई विद्यालयों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। रोटरी क्लब ऑफ झांसी रानी की वाद विवाद प्रतियोगिता में देवप्रिय उक्सा, डा. हेमाली जैन, डा. भूपेंद्र कौर, उपासना बब्बर, पल्लवी जोशी मौजूद रहीं।
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