रविवार को मुकरयाना स्थित प्राइमरी विद्यालय में कैंप लगाकर हिजामा थैरेपी द्वारा लोगों का इलाज किया गया। मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया कि इस थैरेपी से कई बीमारियों का इलाज होता है। यह थैरेपी हजारों साल से लोगों के लिए काफी कारगर साबित हो रही है।
कैंप में दारूल शफा लखनऊ से आए चिकित्सक डॉ. साद अंसारी ने बताया कि यह पद्धति हजारों साल पुरानी है। इस पद्धति से सालों पहले से लोगों का इलाज होता रहा है। इस थैरेपी द्वारा शरीर में रुका हुआ खराब खून को इलाज के माध्यम से केवल तीस मिनट में ही बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे इंसान के शरीर में कोई भी बीमारी पैदा नहीं हो पाती है। वैसे तो हिजामा थैरेपी को चीनी और अंग्रेजी भाषा में कपिंग, मिस्र में बिल कर्न और भारत में मोक्षण नाम से जाना जाता है। इससे जुड़े चिकित्सक कम होने के कारण यह ज्यादा प्रचलित नहीं है। हाल ही में क्रिकेट खिलाड़ी विराट कोहली और ओलंपिक तैराक फेल्प्स ने इस थैरेपी से इलाज कराया है। कैंप में 120 लोगों का इलाज किया गया। इस मौके पर डॉ. मोहम्मद खालिद अंसारी, डॉ. मुजुबुर्रहमान, डॉ. जैन खान, कारी हसीब, हाफिज मोहम्मद अजीम मौजूद रहे।
यह है हिजामा थैरेपी
हिजामा एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है खींच कर बाहर निकालना। अर्थात शरीर से खराब खून को बाहर निकालना ही हिजामा थैरेपी है।
इन रोगों में है उपयोगी
खासतौर पर हर प्रकार के दर्द, सियाटिक, स्लिप डिस्क, सिरदर्द, चर्मरोग, स्पॉडिंलाइटिस, किडनी, हृदय रोग, लकवा, मिर्गी, महिलाओं में इंफर्रटिलिटी, महावारी की समस्या, गर्भाशय व हार्मोनल विकार, अस्थमा, थायरॉइड, पेट, चेहरे पर दाने व दाग धब्बे और गंजेपन में यह थैरेपी कारगर हैं।