जेल चौराहा से ग्रोथ सेंटर हाइवे पुल तक फोर लेन सड़क बनाने के लिए 20 साल पहले बिछाई गई बिजली की लाइन शिफ्ट की जाएगी। इस पर 5.05 करोड़ खर्च होंगे। यह पैसा पीडब्लूडी को देना होगा। जाहिर है कि शिफ्टिंग के दौरान कई इलाकों में बिजली प्रभावित हो सकती है। माना जा रहा है कि अप्रैल में लाइनें शिफ्ट करने का काम शुरू हो जाएगा।
झांसी से बबीना के बीच में सेना, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईल) और बिजौली औद्योगिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वाहनों का आवागमन होता है। वाहनों के दबाव की वजह से झांसी से बबीना के बीच 28 किलोमीटर दूरी तय करने में लगभग डेढ़ घंटे लग जाते हैं। इस कारण अब इस सड़क को फोर लेन किया जा रहा है। यह काम लोक निर्माण विभाग को सौंपा गया है। फोर लेन सड़क बनाने के लिए बिजली की लाइन शिफ्ट करनी होगी। जानकार यह भी कहते हैं कि यदि विकास के लिए दूरगामी योजनाएं बनाई जाएं तो इस तरह पैसे की बर्बादी नहीं होगी। यदि फोर लेन सड़क की योजना पहले बना ली जाती तो शायद इस तरह विद्युत लाइन शिफ्ट करने की नौबत नहीं आती और पांच करोड़ बच जाते।
पीडब्लूडी ने सड़क बनाने से पहले जेल चौराहे से ग्रोथ सेंटर (करीब दस किलोमीटर) हाइवे पुल तक विद्युत विभाग से लाइनें शिफ्ट करने को कहा है। इसके लिए बिजली विभाग ने पांच करोड़ पांच लाख रुपये का स्टीमेट तैयार किया है। इसमें हंसारी ट्रांसमिशन पावर हाउस से जेल चौराहा सबस्टेशन तक हाइटेंशन लाइन, कोर्ट और जिला अस्पताल के स्वतंत्र फीडर के साथ ही 11 केवीए की कुछ लाइनों को शिफ्ट किया जाएगा।
‘पीडब्लूडी से पैसा मिलते ही लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू हो जाएगा। सभी लाइनें नई बनाई जाएगी। पुरानी लाइनों के खंभे, तार और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल छोटे-मोटे दूसरे कामों पर किया जाएगा। बाकी स्क्रेप को बेच दिया जाएगा। लाइन शिफ्टिंग के दौरान बहुत देर के लिए विद्युत आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।’
राकेश कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता (नगर)।
कई करोड़ का झटका
बिना सोचे-विचारे परियोजनाएं शुरू करने का नतीजा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
कई बार बिना सोचे-विचारे योजनाएं तैयार करने के बाद उन्हें अमलीजामा भी पहना दिया जाता है और इससे करोड़ों रुपये बेकार चले जाते हैं। जिले में ऐसी कई परियोजनाएं है, जिसमें ऐसा ही हुआ। देखिए उदाहरण-
दो करोड़ 68 लाख गए पानी में
-मेडिकल कालेज क्षेत्र से जुड़े पिछोर, करगुवां, गुमनावारा, शिवाजी नगर, डड़ियापुरा व कोछाभांवर की पेयजल समस्या को हल करने के लिए 1999 में बराठा बेसिन पेयजल योजना शुरू की गई थी। इसके लिए जल निगम को दो करोड़ 68 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए थे। पूरा पैसा खर्च होने के बाद भी बराठा बेसिन पेयजल योजना से लोगों को पानी की एक बूंद तक नहीं मिल सकी। पाइप लाइन की क्षतिग्रस्त हो गई।
ओवरब्रिज का निर्माण ठप
-झांसी बाईपास पर ओवरब्रिज का निर्माण शुरू किया गया था। इस पर लगभग दो करोड़ खर्च भी कर दिए गए और इसी दौरान सेना ने आपत्ति लगा दी तो निर्माण ठप हो गया। साथ ही तय किया गया कि अब यहां ओवरब्रिज नहीं बनाया जाएगा। जाहिर है कि पैसा बेकार चला गया है।