महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर में इलाज कराते-कराते हेपेटाइटिस बी और सी के 50 रोगियों की हर साल जान चली जाती है। जबकि, 500 लोगों का लिवर डैमेज हो जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर वैक्सीन लगवा ली जाए तो 90 फीसदी तक इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
हेपेटाइटिस की बीमारी पांच प्रकार की होती है, ए, बी, सी, डी और ई। विशेषज्ञों के मुताबिक 30 से 40 फीसदी मरीजों को हेपेटाइटिस ए होता है। इसका कारण गंदा पानी पीना, साफ-सफाई का ध्यान न रखना होता है। ज्यादातर बच्चे इसकी चपेट में आते हैं। वहीं, संक्रमित व्यक्ति का किसी दूसरे में ब्लड, सीरम आदि स्थानांतरित होने से हेपेटाइटिस बी बीमारी हो जाती है। हेपेटाइटिस सी भी संक्रमित रक्त से होता है। हालांकि, ये एंटी वायरल दवाओं से ठीक हो जाता है। इसकी कोई वैक्सीन नहीं है।
वहीं, हेपेटाइटिस डी भी रक्त और ई गंदगी के चलते होता है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि नवजात शिशु के जन्म लेने के 24 घंटे के अंदर हेपेटाइटिस की डोज लगा दी जाती है। फिर छठवें, 10वें और 14वें सप्ताह में भी वैक्सीन लगती है। जिन्होंने अब तक वैक्सीन नहीं लगवाई है, वो तुरंत लगवा लें। टीका लगने से हेपेटाइटिस बीमारी होने की आशंका 90 फीसदी तक कम हो जाती है।
जांच से लेकर इलाज तक नि:शुल्क
मेडिकल कॉलेज में बने हेपेटाइटिस के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि अभी सेंटर में हेपेटाइटिस बी के 196 मरीज पंजीकृत हैं। इनमें 129 का इलाज चल रहा है। वहीं, हेपेटाइटिस सी के 16 मरीजों में 11 का इलाज जारी है। दवाओं से चार रोगी ठीक हो चुके हैं। नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत मेडिकल कॉलेज में मरीजों की नि:शुल्क जांच और इलाज होता है। उन्होंने बताया कि हर साल हेपेटाइटिस बी और सी के 50 मरीजों की जान चली जाती है। जबकि, 500 का लिवर डैमेज हो जाता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- खुली निडिल से इंजेक्शन न लगवाएं
- शेविंग करते समय नया ब्लेड उपयोग करें
- दूसरे का टूथ ब्रश और रेजर इस्तेमाल न करें
- परिवार में किसी को ये बीमारी है तो टीका लगवाएं