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नामांकन में आ सकते थे हेमंत, जानबूझकर हो गए थे गायब

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नामांकन में आ सकते थे हेमंत, जानबूझकर हो गए थे गायब
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झांसी। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की नामांकन प्रक्रिया में हुई किरकिरी के बाद समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष पद से हटाए गए महेश कश्यप ने सपा प्रत्याशी के प्रस्तावक बनाए गए हेमंत सेठ पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हेमंत नामांकन के दौरान आ सकते थे, लेकिन वे खुद गायब हो गए। जिससे पार्टी प्रत्याशी का नामांकन नहीं हो पाया। इसकी वे पूरी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेंगे।
महेश कश्यप ने बताया कि हेमंत सेठ की सहमति लेने के बाद उन्हें सपा प्रत्याशी का प्रस्तावक बनाया गया था। नामांकन के दिन शनिवार को वो सुबह 11 बजे तक मेरे साथ थे। इसी दरम्यान मेडिकल कॉलेज के पास से वे अपनी गाड़ी से मेरी गाड़ी के पीछे हो लिए, लेकिन फिर उनका कोई पता नहीं चला। फोन तक से संपर्क नहीं हो पाया। महेश कश्यप ने कहा कि पुलिस हेमंत का घर जरूर घेरे हुई थी, लेकिन वे घर के बाहर थे। इन परिस्थितियों में वे आसानी से नामांकन में शामिल हो सकते थे, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया, जिससे सपा प्रत्याशी का नामांकन नहीं हो पाया और भाजपा प्रत्याशी के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हुआ। इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट पार्टी के प्रदेशीय नेतृत्व को सौंपी जाएगी।
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झूठ बोल रहे हैं महेश: सेठ
झांसी। चुरारा से जिला पंचायत सदस्य हेमंत सेठ ने सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष महेश कश्यप के आरोप को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि महेश सरासर झूठ बोल रहे हैं। पुलिस सुबह सवा आठ बजे उनके घर के बाहर पहुंच गई थी। इसके बाद वे घर से नहीं निकल पाए। अगर नामांकन में आना नहीं होता तो प्रस्तावक ही क्यों बनते। महेश अपनी कमियों का ठीकरा उनके सिर पर फोड़ना चाहते हैं। हेमंत ने कहा कि सपा प्रत्याशी का प्रस्तावक बनने की वजह से उनके और भाई के खिलाफ मऊरानीपुर में फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया है। अगर वे सपा के साथ न खड़े होते तो उन्हें मुकदमा नहीं झेलना पड़ता।
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