- साइबर क्राइम का लोगो लगाएं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के विकास के साथ ही इसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं। एआई तकनीकी के जरिये साइबर अपराधी आवाज बदलकर लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनकी रकम उड़ा रहे हैं। इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
शहर में रहने वाले युवक स्वराज के पास आई एक फोन कॉल में एक व्यक्ति ने कहा कि वह उसका चाचा बोल रहा है। उसे एक नंबर पर पचास हजार रुपये ट्रांसफर करने हैं, लेकिन उसके यूपीआई से यह रकम ट्रांसफर नहीं हो पा रही है। ऐसे में वह अपने यूपीआई से रकम ट्रांसफर कर दे। एक-दो दिन में वह उसे रकम लौटा देंगे। चूंकि, आवाज बिलकुल चाचा जैसी ही थी और बातचीत का लहजा भी हूबहू चाचा का ही था। इस पर भरोसा कर युवक ने बताए गए नंबर पर तीन बार में पचास हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। एक-दो दिन बाद चाचा से मुलाकात होने पर पता चला कि वह साइबर अपराध का शिकार हो गया है। अपराधी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिये चाचा की आवाज की कॉपी कर उसके साथ ठगी की घटना को अंजाम दिया है। इस तरह के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। यहां तक कि एआई के जरिये आवाज के साथ-साथ चेहरे तक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
-
केस - 1
भाई की आवाज में बोलकर 20 हजार ठगे
सीपरी बाजार में रहने वाली एक महिला के पास अनजान नंबर से फोन आया, जिसमें उसके भाई की आवाज आ रही थी। उसने बताया कि शिवपुरी के पास उसका एक्सीडेंट हो गया है। दुर्घटना में मोबाइल गुम हो गया है, जिस नंबर से वह फोन कर रहा है। उस पर तत्काल 20 हजार रुपये भेज दो, जिस बाइक सवार को टक्कर मारी है, उसे हर्जाना देना है, नहीं तो वह पुलिस केस में फंस जाएगा। इस पर बहन ने तत्काल 20 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके कुछ देर बात जब उसने भाई के नंबर पर फोन लगाया तो पता चला कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गई है।
000000
केस-2
सतर्कता से बच गई रकम
पंचवटी कॉलोनी निवासी कृष्णकांत अग्रवाल के पास आई फोन कॉल में उनके दोस्त मनीष की आवाज आ रही थी। मनीष ने कृष्णकांत से कहा कि उसे 40 हजार रुपये की तुरंत जरूरत है। उसका यूपीआई बंद है, ऐसे में वह जिस नंबर से बात कर रहा है, उस पर पैसे भेज दे। चूंकि, आवाज एकदम मनीष जैसी लग रही थी, इस पर कृष्णकांत ने हामी भर दी। इसके बाद कृष्णकांत को कुछ शक हुआ। क्योंकि, मनीष एक घंटे पहले तक उनके साथ था, तब उसने पैसों का कोई जिक्र नहीं किया था। कृष्णकांत ने मनीष को फोन किया तो सच्चाई सामने आ गई। इससे वह ठगी का शिकार होने से बच गया।
000000
साइबर ठगी से ऐसे बचें....
- यूपीआई से पैसे ट्रांसफर करने से पहले एक बार संबंधित को फोन कर बात जरूर कर लें।
- नियमित रूप से अपने पासवर्ड बदलते रहें।
- एटीएम का पिन नंबर व ओटीपी किसी से भी साझा नहीं करें।
- सोशल प्लेटफार्मों पर अपनी व्यक्तिगत जानकारियां शेयर न करें।
- आसपास होने वाले साइबर अपराधों के बारे परिवार के लोगों से चर्चा करते रहें।
- बैंक खाते की डिटेल कभी भी किसी को फोन पर न दें।
000000
साइबर अपराध से बचने के लिए सतर्कता और जागरूकता दोनों जरूरी हैं। इसके लिए पुलिस की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही शासन ने हर जिले में साइबर क्राइम थाना और हर थाने में साइबर सेल स्थापित कर दी है। इससे साइबर अपराधियों पर आसानी से नकेल कसी जा सकेगी। - ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, एसपी सिटी