झांसी। बरुआसागर के खड़ेसर गांव में बेतवा नदी के किनारे बने टापू में फंसे चार किसान बृहस्पतिवार दोपहर सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए। इनको बाहर निकालने के लिए ग्वालियर से सेना के दो हेलीकॉप्टर बुलाए गए थे। उनकी मदद से इनको एयर लिफ्ट किया गया। चारों किसान 19 अगस्त को अपने खेतों की रखवाली को आए थे लेकिन, अचानक बेतवा नदी में पानी बढ़ जाने से वापस नहीं लौट सके। उनके बाहर निकलने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है।
खड़ेसर निवासी फूल सिंह उर्फ भूरे (17) पुत्र जमुना, अशोक (21) पुत्र चतुर्भुज, मनीराम (40) पुत्र बृजभान एवं हरि (40) पुत्र प्यारेलाल 19 अगस्त को गांव के करीब बने टापू के पास अपने खेत पर गए थे। बाहर निकलने के बाद अशोक ने बताया कि अंदर टापू में उनकी झोपड़ी है। यहां खाने का समान है। बेतवा में पानी बढ़ने के बाद उन लोगों ने एक-दो दिन पानी उतरने का इंतजार किया। पास में ही एक छोटा टापू भी है। मनीराम और हरि दूसरे टापू पर चले गए। इन लोगों के पास मोबाइल था। जब बेतवा में पानी बढ़ने लगा तब बुधवार को इन लोगों ने परिवार के लोगों को फोन करके मदद मांगी। ग्राम प्रधान ने पुलिस को इसकी सूचना दी। इसके बाद उनके बचाव के लिए कसरत शुरू की गई। चित्रकूट से एनडीआरएफ की टीम बुलाई गई लेकिन, बेतवा में तेज बहाव के चलते उनका रेस्क्यू अभियान नहीं चल सका। उधर, बृहस्पतिवार सुबह ही जिलाधिकारी रविंद्र कुमार एवं एसएसपी शिवहरी मीना मौके पर पहुंच गए। वरिष्ठ अफसरों से परामर्श करने के बाद सेना के ग्वालियर कोर से संपर्क साधकर दो हेलीकॉप्टर मांगे गए। दोपहर करीब साढ़े बाहर बजे ग्वालियर से आए दो हेलीकॉप्टरों ने अभियान शुरू किया। करीब डेढ़ घंटे चले रेस्क्यू अभियान के बाद चारों किसान एक के बाद एक करके बाहर निकाल लिए गए। बाहर निकालने के बाद सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।
बाहर आते ही परिजनों से लिपट गए किसान
करीब छह दिन से वीरान टापू मेें फंसे किसान जैसे ही बेतवा के किनारे उतरे, वहां उनके परिजन मौजूद थे। संकट से बाहर निकलकर आए किसान अपने परिजनों से लिपट गए। बाहर आए अशोक एवं भूरे ने बताया कि शुरू में उनको लगा कि जल्द पानी उतर जाएगा। इसके बाद वह अपने घर चले जाएंगे लेकिन, उसी शाम से बेतवा का बहाव बढ़ना शुरू हो गया। तेज बहाव से टापू की मिट्टी भी कटने लगी। रात के अंधेरे में बेतवा के बहाव की तेज आवाज दहशत पैदा करती थी। जब टापू की जमीन कटनी शुरू हो गई तब उन्होंने फोन करके परिजनों से मदद मांगी।
सेना का हेलीकॉप्टर देखकर छुप गए थे दो किसान, किसी तरह बाहर निकलने को हुए राजी
रेस्क्यू करने पहुंचे सेना के हेलीकॉप्टर देखकर मनीराम एवं हरी खेतों के भीतर जा छुपे। वह दोनों बाहर आने को राजी नहीं हो रहे थे। उनको खोजने के लिए हेलीकॉप्टर ने टापू के ऊपर दो चक्कर काटे। उनके न मिलने की सूचना पर ग्राम प्रधान ने उन दोनों से मोबाइल पर संपर्क साधा। उनको काफी समझाया। जिलाधिकारी एवं एसएसपी ने भी दोनोें को समझा-बुझाया तब जाकर वह बाहर आने को राजी हुए। बाहर आने के बाद इन दोनों का कहना था कि अंदर उनके पास राशन था। मछली मारने के लिए वह वहां रुके थे।
टापू के अंदर फंसे चारों किसानों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बेतवा नदी के समीपवर्ती गांवों में मुनादी कराई गई है कि जब तक नदी का जलस्तर बढ़ रहा है तब तक किसान इन जगहों पर जाने से परहेज करें।
रविंद्र कुमार, जिलाधिकारी