झांसी। भले ही बाजार में नकली व मिलावटी शराब की भरमार हो और गरीबी, बेरोजगारी व प्राकृतिक आपदाओं से जेब तंगहाल हो पर शौकीनों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वह धड़ल्ले से गला तर कर रहे हैं। इसका अंदाजा आबकारी विभाग के अभिलेखों में दर्ज जनपद में शराब व बीयर की बिक्री के आंकड़ों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है।
नकली व मिलावटी शराब की बिक्री के हाल ही में कई मामले सामने आ चुके हैं। एक तो शराब पीना स्वास्थ्य के लिए वैसे ही हानिकारक है और यदि यह मिलावटी हो तो फिर यह धीमा जहर जैसी हो जाती है। बावजूद, शौक व आदत के चलते इसकी बिक्री में कोई अंतर नहीं आया है।
इसका अंदाजा अंग्रेजी व देसी शराब तथा बीयर की बिक्री के आंकड़ों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 में अप्रैल से लेकर जनवरी तक जिले में देसी शराब की 25,55,600 लीटर की बिक्री हुई है। इसके अलावा अंग्रेजी शराब की 5,21,478 बोतलें बिकी हैं। जबकि, शौकीन दस माह में बीयर की 20,82000 बोतलें गटक चुके हैं।
जिले में दस माह में शराब व बीयर पर एक अरब एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की जा चुकी है। यह न्यूनतम अनुमानित मूल्य है। वास्तविक कीमत इससे अधिक हो सकती है। इसके अलावा शराब की बिक्री के यह आंकड़े लाइसेंसी दुकानों के हैं। इसके अलावा कच्ची शराब, मध्य प्रदेश व अन्य प्रदेशों से तस्करी कर लाई जाने वाले शराब अलग है।