कहीं स्टाफ तो कहीं संसाधनों का संकट
झांसी। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावों के बीच कई अस्पताल और स्वास्थ्य उपकेंद्र बदहाल व्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। कहीं चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है तो कहीं जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। कई जगह स्वास्थ्य केंद्र नियमित नहीं खुल रहे हैं। इससे ग्रामीणों को सामान्य उपचार के लिए भी दूर जाना पड़ रहा है या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। संवाद
स्टाफ की कमी से पीएचसी की सेहत खराब
टोड़ी फतेहपुर। नगर में संचालित नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से जूझ रहा है। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण क्षेत्रवासियों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आरोप है कि संविदा पर तैनात आयुष चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और एएनएम की नियमित उपस्थिति नहीं रहती है। अक्सर अस्पताल में केवल वार्ड ब्वॉय और चौकीदार ही नजर आते हैं। हालांकि, 12 अगस्त को एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. मनीष कुमार वर्मा की नियुक्ति हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद जगी है।
अस्पताल परिसर में बना जननी सुरक्षा केंद्र निर्माण के बाद से ही उपयोग में नहीं आ सका है। वहीं, अस्पताल की चहारदीवारी भी कई स्थानों पर टूटकर गिर चुकी है। नगर और क्षेत्रवासियों में अव्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी है। प्रभुदयाल पांडेय, सुंदर लाल, धीरेंद्र और रवि कुमार आदि ने बताया कि स्थायी चिकित्सक और पर्याप्त स्टाफ न होने से उन्हें इलाज के लिए निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है। उन्होंने व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है।चिकित्सा अधीक्षक गुरसराय ओपी राठौर ने बताया कि वह स्वयं अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाओं की जांच करेंगे। संवाद
स्टाफ की कमी से पटरी से उतरीं स्वास्थ्य सेवाएं
बरुआसागर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मरीजों के परीक्षण के लिए स्थापित एक्स-रे मशीन टेक्नीशियन के अभाव में बंद पड़ी है। ऐसे में मरीजों को बाहर निजी केंद्रों पर एक्स-रे कराना पड़ रहा है।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस राजपूत ने बताया कि बबीना स्वास्थ्य केंद्र में तैनात एक्स-रे टेक्नीशियन संदीप को सीएमओ कार्यालय से यहां संबद्ध किया गया था, लेकिन उन्होंने केवल पांच दिन सेवाएं दीं। इसकी जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक किसी की तैनाती नहीं हुई।
पीएचसी में तीन चिकित्सकों की तैनाती है। इनमें एक महिला चिकित्सक लंबे समय से अवकाश पर हैं। दो चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें एक दंत रोग विशेषज्ञ हैं। चिकित्सकों के झांसी में निवास करने के कारण अस्पताल बंद होने के बाद आकस्मिक स्थिति में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। संवाद
नियमित नहीं खुलता स्वास्थ्य उपकेंद्र
ककरबई/भदरवाराखुर्द। ग्राम पंचायत कैरोखर में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र भी अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र पर स्वास्थ्य अधिकारी और नर्स तैनात होने के बावजूद यह नियमित रूप से नहीं खुलता। इससे सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी ग्रामीणों को करीब 10 किलोमीटर दूर गुरसराय या गरौठा जाना पड़ता है।
प्रधान केपी आर्य ने बताया कि केंद्र कभी-कभार ही खुलता है। सफाई के अभाव में परिसर में जगह-जगह पेड़-पौधे उग आए हैं। सत्येंद्र सिंह, लोकेंद्र यादव, हीरालाल आर्य, ओमप्रकाश आर्य, लल्लू सिंह और बादाम यादव ने कहा कि लाखों रुपये से बना केंद्र ग्रामीणों के लिए महज शोपीस बनकर रह गया है। उन्होंने केंद्र का नियमित संचालन कराने की मांग की है। संवाद