सिर झुकाकर घंटों मोबाइल पर बिताने व खराब मुद्रा में बैठने की आदत से बच्चे और युवा सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस व साइटिका की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग की ओपीडी में आठ साल के बच्चे से लेकर 30 साल तक के युवा इन समस्याओं को लेकर आ रहे हैं, जिनकी संख्या रोजाना 25 से ज्यादा है।
न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. दिनेश शुक्ला ने बताया कि पहले दफ्तर में एक ही जगह घंटों बैठकर काम करने वाले उम्रदराज लोगों को ही सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या होती थी, मगर अब बच्चे व युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। वजह, घंटों मोबाइल पर एक ही जगह गुजारना है। यही नहीं, जब थकान महसूस होती है तो कभी ऊंची तकिया लगाकर तो कभी आधा लेटकर मोबाइल चलाते रहते हैं, इससे बच्चों और युवाओं को स्पॉन्डिलाइटिस हो रही है।
वह बताते हैं कि बच्चे कोचिंग सेंटरों में बिना बैक सपोर्ट की बेंच पर बैठते हैं, जिससे साइटिका की समस्या हो रही है। कई युवा जिम जाते हैं और अधिक वजन गलत तरीके से उठाते हैं, इससे भी साइटिका हो रही है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस व साइटिका के दर्द से परेशान आठ वर्ष के बच्चे से लेकर 30 वर्ष तक के युवा आ रहे हैं।
यह होती है सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
गर्दन की हड्डी के बीच में डिस्क रहती है, वह खिसककर नस को दबाने लगती है। इससे गर्दन और हाथ में दर्द होने लगता है। उठने-बैठने में चक्कर आते हैं। इसकी वजह लंबे समय तक गर्दन झुकाकर बैठना व मानसिक तनाव है।
यह होती है साइटिका
रीढ़ की हड्डी से निकलने वाली तंत्रिका पर दबाव पड़ता है। पीठ, कूल्हा व पैरों में दर्द होता है। सुन्नपन व झुनझुनी होती रहती है। जब समस्या बढ़ जाती है तो पैरों में कमजोरी आने के साथ मल-मूत्र विसर्जन में दिक्कत होती है।