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Health: मोबाइल में गुम बच्चे झेल रहे यह दुष्प्रभाव, स्क्रीन टाइम को लेकर डॉक्टरों ने किया शोध

Tue, 19 Aug 2025 12:52 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

शोध से पता चला 11 से 18 वर्ष के 43 फीसदी छात्र हर रोज पांच घंटे से अधिक वक्त स्क्रीन पर गुजार रहे हैं। 5-10 वर्ष के 53 फीसदी बच्चे चार-पांच घंटे समय गुजार रहे हैं। इन बच्चों में शारीरिक निष्क्रियता मिली।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार
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यदि आपका बच्चा मोबाइल फोन व टीवी से चिपका रहता है और उसका स्क्रीन टाइम पांच-छह घंटे हैं तो इसके दुष्प्रभाव बेहद गंभीर हो सकते हैं। बच्चे में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी, तनाव और नींद की कमी जैसी समस्या की चपेट में आ रहे हैं। दोस्तों और परिवार के लोगों से घुलने मिलने से दूर हो रहे हैं। यह निष्कर्ष मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया, डॉ. मेघा नेगी और डॉ. कंवलप्रीत छाबड़ा को संयुक्त शोध में निकला है।
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5 से 18 साल के बच्चों पर शोध

तीनों ने एक साल तक पांच से 18 साल के लगभग 600 बच्चों के स्क्रीन टाइम पर शोध करके निष्कर्ष निकाला है। इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी के साथ-साथ पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को शामिल किया गया। शोध से पता चला 11 से 18 वर्ष के 43 फीसदी छात्र में हर रोज पांच घंटे से अधिक वक्त स्क्रीन पर गुजार रहे हैं। 5-10 वर्ष के 53 फीसदी बच्चे चार-पांच घंटे समय गुजार रहे हैं। इन बच्चों में शारीरिक निष्क्रियता मिली। आंखों में दिक्कत मिली। नींद की कमी से तनाव व सामाजिक अलगावं मिला। जंक फूड, मीठे पेय, चॉकलेट आदि के अधिक सेवन की लत मिली। स्क्रीन देखते समय खाने की आदत (माइंडलेस इटिंग) से संतृप्ति संकेतों बाधित होने से ओवर इटिंग (अधिक खाने) की आदत भी मिली। जब सामाजिक और मानसिक समस्याओं पर आकलने किया तो 38.79 फीसदी में व्यवहार संबंधी समस्याएं मिलीं। 49.1 फीसदी बच्चों में भावनात्मक समस्याएं मिलीं। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर मिला। चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी, नींद नहीं आने की दिक्कत मिली। सामाजिक बातचीत से दूरी बनाने के लक्षण मिले।

शोध में पता चला, जो माता-पिता अधिक सम्म्य स्क्रीन पर बिताते हैं, उनके बच्चों में इसकी लत ज्यादा मिली। डॉ. चौरसिया ने बताया बच्चों के लिए कम से कम 60 मिनट मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि जरूरी है अन्यथा मोटापे की संभावना बढ़ती हैं।
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