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Health News: मांसाहार से आंतों पर पड़ता है भारी दबाव, पेट के साथ कई गंभीर बीमारियां होने का खतरा

Sat, 01 Nov 2025 10:59 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

मेडिसिन विभागाध्यक्ष डाॅ. रामबाबू सिंह ने कहा कि शाकाहारी भोजन में रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है। मांस में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है, इसका अधिक सेवन शरीर को नुकसान पहुंचाता है। फाइबर न होने से पाचन में दिक्कत आती है।
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शाकाहारी भोजन - फोटो : संवाद
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विस्तार
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शाकाहारी भोजन में विटामिन, प्रोटीन, खनिज, एंटीऑक्सीडेंट, फाइटोन्यूट्रिएंट और फाइबर होते हैं, जो स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक हैं। ब्लडप्रेशर, हृदय रोग, डायबिटीज आदि बीमारी होने की कम आशंका रहती है। वहीं, मांसाहारी भोजन देर से पचता है, आंतों पर काफी दबाव पड़ता है और पेट के साथ कई गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
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मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नूतन अग्रवाल ने कहा कि हर मौसम की हर पैदावार अपने अंदर खास गुण लिए होती है। थाली में दालें, सब्जी और फल जरूर होने चाहिए। ये प्राकृतिक रूप से पैदा होते हैं, इसलिए इनमें खनिज, एंटीऑक्सीडेंट, फाइटोन्यूट्रिएंट और फाइबर भी काफी मात्रा में होता है। शाकाहारी भोजन काफी सुपाच्य होता है। शरीर के आंतरिक अंग (लीवर, पैंक्रियाज, आमाशय, छोटी आंत आदि) पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। वह बताते हैं कि मांसाहार से पाचन तंत्र गड़बड़ हो जाता है।

मेडिसिन विभागाध्यक्ष डाॅ. रामबाबू सिंह ने कहा कि शाकाहारी भोजन में रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है। मांस में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है, इसका अधिक सेवन शरीर को नुकसान पहुंचाता है। फाइबर न होने से पाचन में दिक्कत आती है। पेट संबंधी विकार काफी होते हैं। हां, मांसाहार में प्रोटीन व विटामिन बी-12 ज्यादा होता है। यदि शाकाहार लोगों को अतिरिक्त प्रोटीन व फाइबर की जरूरत है तो वह पनीर, सोयाबीन, चना आदि से इसकी पूर्ति कर सकते हैं।
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इनसे भरपाई करें प्रोटीन व विटामिन-12 की
डॉक्टरों ने बताया कि शाकाहार भोजन करने वालों के शरीर में प्रोटीन और विटामिन बी-12 की मात्रा कम पाई जाती है। इसकी पूर्ति के लिए पनीर, चना, दालों का प्रचुर मात्रा में सेवन करना चाहिए।


संतुलित रहता है ब्लड शुगर
शाकाहारी भोजन में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट आदि होने से छोटी आंत से भोजन से धीरे-धीरे शुगर रक्त में पहुंचता है, इसकी वजह से शुगर का संतुलन ठीक बना रहता है।
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इतने समय में पचता है भोजन
दूध, जूस, लस्सी, शेक आदि डेढ़ से दो घंटे के अंदर पाचन के लिए छोटी आंत में पहुंचता है, जहां से जरूरी तत्व शरीर में पहुंचते हैं।
दलिया, खीर, खिचड़ी, सूप, खीरा, ककड़ी आदि करीब तीन घंटे में पाचन के लिए छोटी आंत में पहुंचती है।
दाल-रोटी, सब्जी आदि सुपाच्य भोजन करीब चार घंटे में छोटी आंत में पहुंचता है।
मांस को पचाने में आठ से नौ घंटे तक लग जाते हैं।
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