झांसी। बार-बार उपयोग किया जाने वाला तेल सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है। अब इस पर लगाम लगाने के लिए डोम-24 उपकरण खाद्य विभाग को मिल गया है, जो कि खौलते तेल में भी एसिड की मात्रा का पता कर लेता है। सोमवार को खाद्य विभाग की टीम ने इस उपकरण से इलाइट और सीपरी बाजार क्षेत्र में कई दुकानों पर उपयोग किए जाने वाले तेल की जांच की। ज्यादातर में एसिड की मात्रा अधिक मिली। विभाग की टीम उपकरणों के साथ लगातार जांच करेगी, मानक पर खरे न उतरने पर कार्रवाई की जाएगी।
गर्म समोसे, कचौड़ियां, पकौड़े का नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ जाता है। बाजारों में दुकानों पर दिनभर भीड़ लगी रहती है लेकिन शायद आप नहीं जानते हैं कि इन्हें खाने के साथ आप कई तरह की बीमारियों को दावत दे रहे हैं। एक ही तेल को बार-बार गर्म करके तैयार किया जाता है जो सेहत के लिए खतरनाक होता है। किसी भी खाद्य तेल को तीन से अधिक बार गर्म करने पर उसमें ट्रांस फैटी एसिड बनना शुरू हो जाता है। कुल पोलर मॉलिक्यूल के रूप में जाना जाने वाला यह एसिड तेल को हर बार गर्म करने पर पांच से दस प्रशित बढ़ता जाता है। ऐसे तेल में बनने वाली चीजों से किडनी, लिवर, कैंसर व अल्जाइमर हो सकता है। आम जनता को स्वच्छ खानपान उपलब्ध हो सके, इसके लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआईयू) ने खाद्य विभाग को डोम-24 नामक जापान का उपकरण दिया है। इस उपकरण को खौलते तेल में डालकर भी उसमें एसिड की मात्रा का पता लगाया जा सकता है। सोमवार को खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त राजेंद्र सिंह, वरिष्ठ खाद्य विश्लेषक डॉ. अनूप चंद्रा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी आजाद कुमार, उपमा यादव ने इलाइट चौराहा और सीपरी बाजार क्षेत्र में जाकर दुकानों पर इस्तेमाल हो रहे खाद्य तेल की जांच की। बताया गया कि अधिकतर में एसिड की मात्रा ज्यादा पाई गई है। टीम ने दुकानदारों को एक तेल को बार-बार उपयोग न करने के निर्देश दिए हैं। वरना आगे कार्रवाई की जाएगी।
बार-बार तेल गर्म करने का नुकसान
- ब्रेस्ट कैंसर के साथ कई तरह के कैंसर को बढ़ाता।
- शरीर में बेड कोलेस्ट्रॉल का इजाफा करता।
- एसिडिटी का कारण बनता है।
- नुकसानदायक टॉक्सिन निकलते हैं।
- रिहीटिंग वेजिटेबल ऑयल खाने को बनाता है बासा।