बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र में अपनी पत्नी की जांच करवाने पहुंचे कुलसचिव को कोई चिकित्सक नहीं मिला। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य केंद्र में संविदा पर चार चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है। प्रतिदिन हर चिकित्सक को महज चार घंटे बैठने के एवज में पांच सौ रुपये मिलते हैं। इस हिसाब से महीने का मानदेय पंद्रह हजार होता है, लेकिन चिकित्सक केंद्र में चंद घंटे भी गुजारने को तैयार नहीं हैं। शुक्रवार को इसकी पोल कुलसचिव अखिलेश चंद्र के सामने खुल गई। कुलसचिव अपनी पत्नी की जांच कराने के लिए शाम करीब तीन बजे स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो उन्हें कोई भी चिकित्सक वहां नहीं मिला। इस पर वह बिफर गए और वहां मौजूद कर्मचारियों पर नाराजगी व्यक्त की। सूत्रों की मानें तो संविदा पर तैनात डॉक्टर ठीक तरह से अपनी ड्यूटी का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। सिर्फ रजिस्टर पर उनकी उपस्थिति फुल टाइम होती है। अकसर डॉक्टर निर्धारित समय से देरी से आते हैं और पहले चले जाते हैं। कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि डॉक्टर आए बिना ही उपस्थिति लगा देते हैं।