झांसी। बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोविड के दौरान खरीदे गए उपकरण व अन्य सामान पर घोटाले के बादल मंडरा रहे हैं। यहां पर रहे तैनात कर्मचारी का स्थानांतरण हुए चार महीने बीत चुके हैं। कई बार पत्र लिखने के बावजूद उक्त कर्मचारी ने नवीन तैनाती पाए कनिष्ठ सहायक को वित्तीय अभिलेख समेत अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए हैं। अब स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में दो सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है।
सीएचसी बड़ागांव में तैनात रहे एक कर्मचारी का तबादला फरवरी में दूसरी सीएचसी कर दिया गया था। इसके बाद वहां पर कनिष्ठ सहायक प्रदीप की तैनाती कर दी गई। प्रदीप ने सीएमओ को दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि पूर्व में तैनात रहे कर्मचारी ने सेवा पुस्तिका, जीपीएफ पासबुक प्राप्त कराने के साथ ही दो बिल रजिस्टर दिए थे। बाद में 22 फरवरी को ऑडिट करोन के लिए समस्त सेवा पुस्तिका और जीपीएफ पासबुक लिखित रूप में पुन: प्राप्त कर ली गई थी। ऑडिट के बाद जब कनिष्ठ सहायक सेवा पुस्तिका, पासबुक के साथ-साथ लेखा, स्थापना, स्टाफ आदि अन्य रिकॉर्ड व अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया मगर उसे ये अभिलेख नहीं दिए गए। बताया कि पूर्व कर्मचारी द्वारा दी गई लगभग सभी सेवा पुस्तिकाएं, जीपीएफ पास बुक कई सालों से अपूर्ण थीं। प्रार्थनापत्र में कनिष्ठ सहायक ने सीएमओ से पिछले सालों के डिस्पैच रजिस्टर, गार्ड फाइल, लेखा, कैशबुक, स्टॉक रजिस्टर आदि आवश्यक पत्रावलियां, रजिस्टर, बिल-बाउचर आदि प्राप्त न होने पर जून में कन्करेंट ऑडिट कराने से हाथ खड़े कर दिए। साथ ही अंदेशा जता दिया कि पूर्व कर्मचारी द्वारा चार्ज हस्तांतरण न करना बड़ी अनियमितता, हेराफेरी की ओर इशारा करता है। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी रितेश कुमार सिंह की तरफ से भी समस्त रिकॉर्ड देने के लिए संबंधित कर्मचारी को पत्र लिखा गया। चेताया भी कि यह कृत्य उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के साथ ही बेहद गंभीर व शासकीय नियमों के खिलाफ है। इसका भी पूर्व में तैनात रहे कर्मी पर कुछ असर नहीं हुआ। अब सीएमओ ने एसीएमओ और जिला प्रशासनिक अधिकारी की दो सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को सभी रिकॉर्ड का परीक्षण और लेखा चार्ज हस्तांतरण कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही एक सप्ताह के अंदर आख्या देने को कहा है।