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हजयात्री मिना पहुंचे, हज के अरकान शुरू

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हजयात्री मिना पहुंचे, हज के अरकान शुरू
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झांसी। हज के लिए सारे हजयात्री मिना के मैदान में पहुंच गए हैं। वहां पर वह शुक्रवार को दिन-रात गुजारेंगे। शनिवार को आजमीन (हजयात्री) अरफात के लिए रवाना होंगे। शहर से गए आजमीनों ने भी अपने घर वालों को फोटो भेजे हैं। मिना को टेंट सिटी भी कहते हैं। यहां पर आजमीनों को खेमों यानी टेंटों में रहना होता है। इस बार जिले से 264 हज यात्री गए हैं।
इस्लामिक महीना जिलहिज की शुक्रवार को सात तारीख रही जबकि सऊदी अरब में आठ तारीख है। गुरुवार को ही मगरिब की नमाज पढ़ने के बाद आजमीनों की मिना के लिए रवानगी शुरू हो गई थी। शहर के प्रेम नगर निवासी जहीरुद्दीन अपनी पत्नी के साथ हज पर गए हैं। उन्होंने भी टेंट की तस्वीर भेजी है। सारे आजमीन अपने-अपने खेमों में हैं। मिना में सभी आजमीन एहराम में हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर सभी तरह का भेद मिट गया है। पूरी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए आजमीन एहराम (दो बिना सिली चादर) में हैं। मिना में लब्बैक अल्लाह हुम्मा लब्बैक ला शरीका, लका लब्बैक इन्नल हमदा व नेयमता लका वल मुल्क ला शरीका लका, पढ़ते हुए हज यात्री आगे बढ़ते हैं। इसका मतलब है कि हाजिर हूं, ऐ अल्लाह, आपका कोई शरीक नहीं, मैं हाजिर हूं, सारी तकलीफें और सब नेयमतें आप ही के लिए हैं और सारी दुनिया पर हुकूमत आपकी ही है। मगर हक तो यहां है कि हक अदा हो जाए।
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नौ जिलहिज (शनिवार) को गुस्ल करके सभी आजमीन-ए-हज अरफात के लिए रवाना होंगे। वहां पर शाम तक ठहरेंगे। अरफात में जोहर और अस्र की नमाज इकट्ठी पढ़ी जाएगी। इसके बाद हज यात्री सूरज डूबने के बाद मुज्दल्फफा की तरफ रवाना होंगे। वहां पर मगरिब और इशा की नमाज एक साथ पढ़ेंगे। रात को मुज्दल्फा में ही ठहरेंगे। इसके बाद 10 जिलहिज को फज्र की नमाज के बाद मिना की ओर रवाना होंगे। दोपहर से पहले मिना पहुंचकर जमरा में सात कंकरियां मारेंगे। फिर कुर्बानी कराने के बाद सारे आजमीन (औरतों को छोड़कर) सिर के बाल मुंडवाएंगे। इसके बाद एहराम उतारकर कपड़े पहनेंगे।
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