पिछले एक दशक से हवा में उड़ान भर रही हवाई अड्डे की स्थापना की योजना धरातल पर पहुंचने से पहले ही क्रेश हो गई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने झांसी में हवाई अड्डे की उपयोगिता को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही हवाई अड्डा के लिए जारी कवायद को विराम लग गया है।
हवाई अड्डा पिछले एक दशक से स्वर्ण मृग की भांति झांसी की जनता को अपने आसपास भ्रमण करता नजर आ रहा था। आखिर हो भी क्यों न? इसके लिए प्रयास भी तेजी से किए जा रहे थे। जनप्रतिनिधि व राजनेता, सभी अपने - अपने स्तर से झांसी में हवाई अड्डे की स्थापना को लेकर प्रयास कर रहे थे। पहले ग्वालियर रोड पर स्थित आर्मी एयर स्ट्रीप के विस्तारीकरण की योजना बनाई गई थी, लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने विभिन्न तकनीकी खामियों के चलते इन संभावनाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद झांसी सदर तहसील के ग्राम सफा व चमरौआ की 200 हेक्टेअर जमीन चिह्नित की गई। जिला मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर इस जमीन पर एएआई के मानकों के अनुसार हवाई अड्डे का मानचित्र भी तैयार कर लिया गया था। प्रस्तावित मानचित्र में रनवे की लंबाई चार हजार मीटर तथा चौड़ाई साढ़े तीन सौ मीटर रखी गई थी। यह मानचित्र प्रदेश के नागरिक उड्डयन विभाग व एएआई को भेज दिया गया था। लेकिन, पिछले दिनों लखनऊ में हुई एएआई व नागरिक उड्डयन विभाग की संयुक्त बैठक में झांसी में हवाई अड्डे की स्थापना की संभावनाओं को खारिज कर दिया गया।
एएआई के अधिकारियों ने कहा कि झांसी में रेल मार्ग की देश के सभी बड़े शहरों से कनेक्टिविटी है। इसके अलावा फोरलेन मार्ग के जरिये भी झांसी से देश के किसी भी हिस्से में आसानी से जाया जा सकता है। ऐसे में झांसी में हवाई अड्डे की कोई विशेष उपयोगिता नहीं है। साथ ही यहां हवाई यात्रा के लिए ज्यादा यात्री मिलना भी आसान नहीं होगा, जिसके चलते हवाई अड्डे की स्थापना की कवायद को विराम लग गया है।