मुनाफा तो दूर किसानों को सता रही लागत तक न निकलने की चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। किसी को बिटिया की शादी करनी थी, किसी को अपना नया आशियाना बनवाना था। कुछ इन्हीं अरमानों को मन में संजोकर किसानों ने कड़ी मेहनत से रबी की फसल की बुवाई की। मगर शनिवार को हुई ओलावृष्टि ने उनके सारे अरमानों को तोड़ दिया। ओले गिरने से खेतल में खड़ी फसल बिछी तो किसानों के चेहरे भी मुरझा गए। प्रदेश सरकार और प्रशासन के निर्देश पर रविवार को जब राजस्व विभाग की टीम बर्बाद फसल का आकलन करने गांवों में पहुंची तो अपनी मेहनत की बर्बादी का मंजर देख महिला किसान फफक पड़ीं। रानीपुर में महिला किसानों की आंखों से झरते आंसू उनकी पीड़ा को बयां कर रहे थे। महिलाओं ने कहा कि बहुत मेहनत और अरमानों से फसल को बोया था। इस बार की फसल से काफी उम्मीदें थीं। अब मुनाफा तो दूर लागत निकलने तक की चिंता सता रही है। किसी ने कर्ज लेकर फसल की बुवाई की थी, तो किसी ने पूरी पूंजी फसल को बोने में लगा दी थी। राजस्व टीम ने महिलाओं को ढांढस बंधाया। कुछ ऐसे ही हालात जिले के अन्य इलाकों में भी नजर आए।
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खराब फसल लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे किसान
झांसी। बारिश और ओलावृष्टि से खराब फसल लेकर रविवार को किसान कलक्ट्रेट पहुंच गए। यहां प्रदर्शन करते हुए किसानों ने अपनी पीड़ा बताई। वहीं किसानों ने सदर तहसील में शिवपुरी-ललितपुर बाईपास पर दुर्गापुर में जाम लगाया। किसानों ने कहा कि ओलावृष्टि से उनकी लागत और मेहनत पर पूरी तरह से पानी फिर गया है। किसानों ने नगर मजिस्ट्रेट को अपना मांग पत्र भी सौंपा।
मऊरानीपुर में ओले लेकर आए किसान, लगाया जाम
वहीं मऊरानीपुर में किसानों ने झांसी-खजुराहो राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित गांव अटारन और टीकमगढ़ रोड पर जाम लगाया। किसान ट्रैक्टर में ओले और खराब फसल लेकर आए। किसानों ने तहसील कार्यालय पर भी प्रदर्शन कर मुआवजा दिलाने की मांग की। किसानों और समझाने और जाम खुलवाने में मऊरानीपुर तहसील प्रशासन को पांच घंटे का समय लग गया। इस दौरान हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की कतार लगी रही।
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आत्महत्या करने के लिये पेड़ पर चढ़ा किसान
मऊरानीपुर ग्राम अटारन के पास लगे जाम के दौरान एक किसान गमछा लेकर आत्महत्या करने के लिए पेड़ पर चढ़ गया। किसान ने कहा कि उसकी आठ बेटियां है। ओलावृष्टि में पूरी फसल नष्ट हो गई। इस पर मौके पर मौजूद अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए। काफी देर समझाने के बाद अफसरों ने किसान को पेड़ से उतारा।
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बीमा कंपनी के साथ तीन विभागों ने शुरू किया सर्वे
बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों के सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वरुण कुमार पांडेय ने बताया कि राजस्व विभाग, कृषि विभाग, पंचायत राज विभाग और बीमा कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से प्रभावित गांवों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। इसकी रिपोर्ट 72 घंटे में आ जाएगी। 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान सामने आने पर किसानों को मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
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पीड़ित किसानों के बीच पहुंचे नेता, साझा की पीड़ा
रविवार को पीड़ित किसानों के बीच पहुंचकर नेताओं ने उनकी पीड़ा साझा की। सांसद अनुराग शर्मा ने रक्सा क्षेत्र के गांवों में पहुंचकर किसानों की समस्याओं को सुना। उन्होंने झांसी और ललितपुर जनपद के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर फसलों को हुई क्षति का सर्वे कर किसानों को मुआवजा दिलाने की बात कही। वहीं, पूर्व मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने भी प्रभावित गांवों का भ्रमण कर प्रशासन से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की। बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा और सदर विधायक रवि शर्मा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर फसल नुकसान का सर्वे और मुआवजा दिलाने की मांग की। सपा के पूर्व महासचिव अर्जुन सिंह यादव ने भी फसल नुकसान का सर्वे कराने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा।
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लुहरगांव में गिरे ओले
रविवार शाम को रानीपुर के गांव लुहरगांव में ओलावृष्टि हुई। इससे खेतों में खड़ी गेहूं, मटर, मसूर, चना की फसल बिछ गई। इससे किसान परेशान नजर आए।
मवेशियों पर भारी पड़ी ओलों की मार
शनिवार को हुई ओलावृष्टि मवेशियों पर भारी पड़ी है। रक्सा क्षेत्र में ओलों की वजह से तीन दर्जन से अधिक बकरियों की मौत हो गई। शनिवार की शाम ग्रामीण बकरियों को चरा रहे थे। इसी दरम्यान अचानक ओलावृष्टि हो गई। इससे किसानों को अपने मवेशियों को बचाने का मौका नहीं मिल पाया।
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बोले पीड़ित किसान...
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बीस बोरा गेहूं बोया था, लेकिन अब दो बोरा उपज मिलने की भी उम्मीद नहीं है। लागत के साथ मेहनत पर भी बारिश और ओलावृष्टि ने पानी फेर दिया। कुदरत ने हमें मोहताज कर दिया। - जगदीश यादव, सैंयर
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फसल पककर तैयार हो गई थी। इस बार अच्छी पैदावार होने की पूरी उम्मीद थी। लेकिन, सब बेकार हो गया। फसलें खेत में बिछी हुईं हैं। खेतों में पानी भरने की वजह से जड़ें भी सड़ने लगी हैं। - राहुल यादव, सैंयर
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बारिश और ओलावृष्टि से सरसों के फूल झड़ गए, जबकि गेहूं की बालियां भी बिखर गईं हैं। उम्मीदों पर कुदरत ने पूरी तरह से पानी फेर दिया है। अब तो सिर्फ सरकार से ही राहत की उम्मीद है। - करन सिंह, अमरपुर
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पंद्रह दिन बाद कटाई शुरू होनी थी, लेकिन मौसम की मार की वजह से सरसों, चना, गेहूं सब बर्बाद हो गया। ऐसे में प्रशासन को किसानों को मुआवजा के लिए इंतजार नहीं कराना चाहिए। - मट्ठू अहिरवार, अमरपुर