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गुरसरांय व बामौर का इतिहास होगा उजागर

Thu, 02 Jun 2016 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा जिले के गुरसरांय व बामौर विकासखंड की पुरातत्व सर्वेक्षण रिपोर्ट वर्ष के  अंत तक संयुक्त रूप से प्रकाशित की जाएगी। इस रिपोर्ट में उक्त दोनों ब्लाकों के प्राचीन स्मारकों के इतिहास एवं   महत्व का उल्लेख किया जाएगा।
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गौरतलब है कि बुंदेलखंड के इतिहास की परतों को खोलने में जुटी विभाग की क्षेत्रीय इकाई द्वारा जिले के  प्रत्येक गांव क ा पुरातत्व सर्वेक्षण किया जा चुका है। इससे पहले विभाग द्वारा मऊरानीपुर व बंगरा की रिपोर्ट प्रकाशित की जा चुकी है। सर्वेक्षण के दौरान विभाग को चौंकाने वाली ऐतिहासिक एवं पुरा संपदा मिली है, जो मानव सभ्यता के क ई दौर की अहम गवाह है। इसे आम जनता के मध्य लाने के लिए विभाग समय - समय पर फोल्डर एवं पुस्तक प्रकाशित करता रहा है।

इसी क्रम में विभाग ने जनपद के मऊरानीपुर व बंगरा के पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट को प्रकाशित किया, इसके पश्चात प्रतीक्षा थी कि जनपद के अन्य ब्लाकों की भी पुरातत्व सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रकाशित हो, ताकि आम नागरिक अपने क्षेत्र एवं गांव के इतिहास से रूबरू हो सके।
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क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे ने बताया कि वर्ष के अंत तक संयुक्त रूप से बामौर व गुरसरांय क ी पुरातत्व सर्वेक्षण रिपोर्ट को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा, इसके  लिए पर्याप्त बजट है। उनके अनुसार पुस्तक में दोनों ब्लाकों के गौरवशाली इतिहास, पुरा स्मारकों का फोटो सहित उल्लेख होगा।

इमलौटा में मिले एरच से भी पुरानी सभ्यता के अवशेष
यह जानकर आश्चर्य होगा कि गुरसरांय की धसान नदी से लगे गांव इमलौटा में एरच से भी पुरानी सभ्यता है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी के अनुसार इमलौटा में लगभग तीन हजार ईसा वर्ष पूर्व से भी पुरानी सभ्यता के पत्थर के औजार मिले हैं। इसी प्रकार बम्होरी, गाता, खेड़ी, बसरिया आदि ग्रामों में भी औजार व मिट्टी के बर्तन मिले हैं। वहीं ग्राम टोला में 10 वी सदी की ब्रह्मा की, डोरिया में 9 वी सदी की गज लक्ष्मी व गणेश की, पंडवाहा में लघु पाषाण युग के औजार, बडवार, वीरसिंह पुरा, हवूपुरा, हैवतपुरा, निपान, ताई, धवारी, लुहरगांव, सेमरी, मढ़ा आदि गांवों से भी प्राचीन प्रतिमाएं मिली है।  


बामौर में मिली बौद्ध देवी हरीति की प्रतिमा
ऐतिहासिक पुरातन संपदा की दृष्टि से बामौर काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां के भरसूडा गांव में विभागीय टीम को कुषाण कालीन बौद्ध धर्म की देवी हारीति की प्रतिमा और सिक्के मिले हैं। यह प्रतिमा बुंदेलखंड में सबसे प्राचीन मानी जाती है। इसी प्रकार ग्राम डुमरई में लखेरी नदी के बीच स्थित चट्टान पर एक लाइन में चट्टान को काटकर बनाए सात शिवलिंग हैं, जो चंदेल कालीन माने जाते है।

वहीं कैरोखर के एक मंदिर में लगभग नौ वीं शताब्दी में निर्मित मेष मुखी देवी की अष्टभुजी प्रतिमा है। इसके अलावा नागर, बरगांय अहीर, बछेह, खिदरपुरा आदि गांवों में भी कई सदी की प्रतिमाएं मिले है।

 संबंधित गांवों में भेजी जाएगी सर्वेक्षण रिपोर्ट की पुस्तक
 क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एस के  दुबे के मुताबिक सर्वेक्षण रिपोर्टों की प्रकाशित पुस्तकों को अब विभाग  संबंधित गांवों में पहुंचाएगा। इसके लिए ग्राम सभाओं से संपर्क किया जाएगा। उनके अनुसार सर्वेक्षण पुस्तक का मूल्य 150 रुपये है, जिसे पुरातत्व विभाग से प्राप्त किया जा सकता है।
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