झांसी। युवा पीढ़ी में धर्म के प्रति आस्था बढ़ रही है। इस बार रमजान माह में शहर के कई युवाओं ने पहली बार रोजा रखा। यह अनुभव उनके लिए बेहद सकारात्मक रहा। उन्होंने बताया कि इससे उनकी दिनचर्या में कोई फर्क नहीं आया है, बल्कि दिन भर खाना - पानी से दूर रहने के बाद भी उनमें ऊर्जा बनी रही है। साथ ही सब्र और अनुशासन की सीख भी मिली।
किचिन की ओर देखा भी नहीं
मोहनी बाबा निवासी 16 साल के बिलाल खान ने हाईस्कूल परीक्षा पास करने के बाद पहली बार रोजा रखा है। वह कहते हैं कि सहरी के बाद से वह लगातार किचिन से दूरी बनाए हुए हैं, ताकि मन डांवांडोल न हो। बिलाल कहते हैं कि यह उनके लिए खास अनुभव रहा।
वह किसी तरह की शारीरिक कमजोरी का अनुभव नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एजूकेशन और रिलीजन में समानता है। दोनों में ही अनुशासन और धैर्य सिखाया जाता है।
आत्मविश्वास हुआ मजबूत
मोहनी बाबा निवासी दसवीं की परीक्षा पास करने वाले अली ने भी पहली बार रोजा रखा है। वह कहते हैं कि दिन भर खाना न खाने व पानी न पीने के बारे में वह सोच भी नहीं सकते थे। लेकिन, अब रोजा रखने में उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है। यहां तक कि टीवी से भी वह दूर हैं।
यह उनके लिए अलग ही अनुभव रहा है। इससे आत्मविश्वास मजबूत हुआ है, साथ ही सकारात्मक सोच के साथ वह अपने को हल्का महसूस कर रहे हैं।
भूख का अहसास भी नहीं हुआ
इतवारी गंज निवासी 12 वर्षीय फैजान कहते हैं कि उन्होंने अपनी जिद से रोजा रखा है। गर्मी अधिक होने की वजह से परिवार के लोग इसके लिए मना कर रहे थे। एलवीएम इंटर कालेज में पढ़ने वाले फैजान ने बताया कि रोजे के पहले दिन उन्हें भूख-प्यास का अहसास भी नहीं हुआ और न ही गर्मी से उन्हें किसी तरह की परेशानी हुई। यह जीवन का यादगार अनुभव रहा है। अब अपनी इच्छाओं पर काबू पाना बेहद आसान हो गया है।
दोस्तों के साथ रखा रोजा
इतवारी गंज निवासी 13 साल के अमन भी पहली बार रोजे से हैं। उन्होंने बताया कि उनके सभी दोस्तों ने रोजा रखा है। इसलिए उन्होंने भी इस बार रोजा रखा। इससे उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई, बल्कि आम दिनों से ज्यादा अच्छा फील हुआ।
इसके अलावा उन्होंने पांचों वक्त की नमाज पढ़ी और धार्मिक आयोजनों में भी हिस्सा लिया। अमन ने बताया कि रोजे के दौरान उन्हें भूख-प्यास की याद भी नहीं आई। दिन बेहद अच्छा गुजरा।