झांसी। पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी ने प्रदेश के कई हिस्सों में धमाकेदार प्रदर्शन किया है, लेकिन झांसी में सपा पिछड़ गई है। इसकी वजह पार्टी में स्थानीय स्तर पर हावी गुटबाजी बताई जा रही है। जिसका नतीजा ये रहा कि पार्टी जिला पंचायत की सभी सीटों पर प्रत्याशी भी घोषित नहीं कर पाई और चुनाव के दरम्यान कई सीटों पर सपाई ही आमने-सामने रहे। नतीजतन, पिछले जिला पंचायत चुनाव में 16 सीटें पाने वाली सपा इस चुनाव में खिसककर चार पर आ पहुंची है।
ग्रामीण इलाकों में समाजवादी पार्टी का बड़ा वोट बैंक माना जाता है। सपा जब भी प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई, उसमें ग्रामीण मतदाताओं का बड़ा योगदान रहा। जबकि, पंचायत की राजनीति में सपा पिछले दो दशक से अधिक समय से हावी है। 2015 के पंचायत चुनाव में सपा जिला पंचायत की 24 में से 16 सीट हासिल करने में कामयाब हुई थी। जबकि, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को महज चार-चार सीटों से संतोष करना पड़ा था। लेकिन, इस चुनाव में सपा 16 सीटों से खिसककर चार पर आ पहुंची है। इसकी सबसे बड़ी वजह पार्टी में हावी गुटबाजी बताई जा रही है, जो पंचायत चुनाव की तैयारियों की शुरुआत से ही नजर आने लगी थी। पार्टी के सभी बड़े नेताओं ने अपने-अपने प्रत्याशियों को आशीर्वाद दे रखा था। सभी अपने पसंद के प्रत्याशी को टिकट देने पर अड़े हुए थे। इससे हालात ये रहे कि जिला पंचायत की 24 सीटों में से सपा सात पर प्रत्याशी ही नहीं घोषित कर पाई। इन सीटों पर सपा के लोग ही आमने-सामने चुनाव लड़ते नजर आए। नेता भी आपस में बंटे रहे। कोई नेता किसी प्रत्याशी के साथ खड़ा नजर आया, तो किसी की फोटो दूसरे प्रत्याशी के पोस्टर में नजर आई। संगठन की इस खींचतान का खामियाजा पार्टी को सीट गंवाकर चुकाना पड़ा।
पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। पूरी पार्टी एक है। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में ये सामने आ जाएगा। सपा का ही जिला पंचायत अध्यक्ष बनेगा। रही बात सात सीटों पर प्रत्याशी न उतारने की तो इन सीटों पर सपा के ही कई लोग टिकट मांग रहे थे। ऐसे में प्रत्याशी घोषित नहीं किए गए। अलबत्ता इन सात सीटों में से पांच पर सपा के सक्रिय सदस्य ही जीतकर आए हैं। ऐसे में जिला पंचायत की हमारे पास सीधे तौर पर नौ सीटें हैं। ग्राम प्रधान व बीडीसी में भी सपा अन्य सभी दलों से आगे रही है।
- डा. चंद्रपाल सिंह यादव, पूर्व सांसद
बसपा की भी एक सीट हुई कम
झांसी। समाजवादी पार्टी की तरह बहुजन समाज पार्टी का भी ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा जनाधार माना जाता है। लेकिन, इस चुनाव में बसपा पिछले पंचायत चुनाव का प्रदर्शन भी नहीं दोहरा पाई। पिछले चुनाव में बसपा की जिला पंचायत में चार सीटें थीं, जबकि इस बार तीन सीटों पर संतोष करना पड़ा। बसपा के खाते में जिला पंचायत की वार्ड नंबर दो (साकिन), वार्ड नंबर 15 (देवरी सिंहपुरा) व वार्ड नंबर 21 (भसनेह) गईं हैं। हालांकि, बसपाई इससे इत्तेफाक नहीं रखते। बसपा जिलाध्यक्ष राजू राजगढ़ ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बसपा का जनाधार कायम है। बल्कि, इसमें बढ़ोत्तरी ही हुई है। भाजपा के इशारे पर चुनाव में हुई गड़बड़ी की वजह से हमें तीन सीटें भरोसा, सकरार व भदरवारा सीट पर हराया गया। इसके अलावा अन्य कई सीटों पर बसपा बेहद कम अंतर से हारी है।
कांग्रेस की मामूली बढ़त, एक सीट मिली
झांसी। इस पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने भी मामूली बढ़त बनाई है। जिला पंचायत की एक सीट हासिल की है। जबकि, 2015 के चुनाव में कांग्रेस शून्य पर रही थी। जिला पंचायत के वार्ड नंबर 20 (मारकुआं) से कांग्रेस प्रत्याशी नेहा निरंजन ने जीत हासिल की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता प्रदीप जैन ने कहा कि कांग्रेस चार सीटों पर दूसरे स्थान पर रही है। इतना ही नहीं, पिछले चुनाव के मुकाबले इस पंचायत चुनाव में कांग्रेस के वोटों में भारी वृद्धि हुई है। ये आने वाले समय के लिए अच्छा संकेत है।