झांसी। गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने को 11 जुलाई को रिकार्ड वृक्षारोपण होना है। 24 घंटे में जिले में 12.99 लाख पौधे रोपे जाएंगे। वन विभाग ने अभियान को सफल बनाने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। कर्मचारियों को ड्यूटी कार्ड जारी कर दिए गए हैं। गड्ढों के पास पौधे रखवा दी गई गईं, ताकि पौधरोपण के समय को बचाया जा सके।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने को प्रदेश में पांच करोड़ पौधे रोपे जा रहे हैं। पौधरोपण ग्यारह जुलाई को सुबह दस बजे से बारह जुलाई को सुबह दस बजे तक होगा। अभियान के तहत जनपद में 114 वन क्षेत्रों में 12.99 लाख पौध रोपी जाएंगी। इसके लिए पंद्रह हजार से अधिक मजदूरों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा पौधरोपण की मॉनीटरिंग के लिए 684 ऑडिटर और गवाह तैनात किए गए हैं। विभाग ने सभी को ड्यूटी कार्ड जारी कर दिए हैं। इसके अलावा पौधरोपण के लिए खोदे गए गड्ढों के पास अभी से पौध रखवा दी गईं हैं। इस दिन विभिन्न प्रजातियों की चार से बारह फीट ऊंचाई की पौध रोपी जाएंगी।
गिनीज बुक की टीम ने डाला डेरा
पौधरोपण अभियान पर नजर रखने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड की टीम ने झांसी में डेरा डाल लिया है। टीम ने इसकी सूचना भर वन विभाग के अधिकारियों को दी है। रुकने का स्थान या अपने संबंध में अन्य कोई जानकारी नहीं दी है। टीम अपने स्तर पर पौधरोपण की मॉनीटरिंग करेगी।
हर जगह रहेगी सांप-बिच्छू की दवा
एसडीओ /नोडल अधिकारी ए. के. मालवीय ने बताया कि पौधरोपण के दौरान वन विभाग की सभी 114 साइट पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रहेगी। टीम के पास अन्य दवाओं के साथ-साथ बिच्छू और सर्वदंश से बचाव की दवाएं रहेंगी। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए हर ब्लाक पर दो एंबुलेंस भी तैयार रहेंगी। पीने के पानी के लिए टैंकरों की व्यवस्था रहेगी।
अब और बढ़ गया काम
वन विभाग के तय शिड्यूल के अनुसार पौधरोपण के लिए फरवरी - मार्च माह में गड्ढे कर दिए जाते हैं। मई - जून की गर्मी तक इन्हें खुला रखा जाता है, ताकि कीड़े मर जाएं। इसके बाद गड्ढों में खाद डालकर भर दिया जाता है। इस बार वन विभाग ने इस भरे हुए गड्ढों को अभी हाल ही में खुलवा दिया गया है, ताकि पौधरोपण के दौरान समय बच सके। लेकिन, अब गिनीज बुक की ओर से निर्देश आए हैं कि अभियान के दौरान ही गड्ढों को खोदकर पौधरोपण किया जाए, जिसके चलते अब एक बार फिर गड्ढे भरे जा रहे हैं।
‘पौधरोपण अभियान को सफल बनाने की तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। तैयारियों का हर स्तर पर परख लिया गया है। इस काम में लगाए गए सभी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गईं हैं।’
- डा. मनोज कुमार शुक्ला, प्रभागीय वनाधिकारी