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25 को खत्म हो रहा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल, अब प्रशासक कौन

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झांसी। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 दिसंबर को खत्म हो जाएगा लेकिन, इनकी बागडोर आगे किसे सौंपी जाएगी इसकी तस्वीर अब तक साफ नहीं हुई। इस संबंध में शासन से दिशा-निर्देश जारी न होने से पंचायती राज विभाग समेत ग्राम पंचायतें ऊहापोह में फंसी हैं।
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पंचायती राज अधिनियम के मुताबिक ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने तक नई पंचायत गठित हो जानी चाहिए लेकिन, कोविड-19 के चलते चुनाव समय पर नहीं हो सके। जनपद की सभी 425 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 दिसंबर को खत्म हो जाएगा। उसके बाद ग्राम पंचायत एवं प्रधानों के वित्तीय अधिकार भी खत्म हो जाएंगे। पंचायत संबंधी नीतिगत निर्णय भी नहीं ले सकेंगे। ऐसी परिस्थिति में पंचायत की गतिविधि संचलित करने के लिए प्रशासक तैनात किए जाने हैं। कुछ समय पहले सहायक विकास अधिकारी स्तर के अधिकारियों को प्रशासक बनाने जाने के संकेत दिए गए थे। पंचायती राज, ग्राम विकास, समाज कल्याण, सांख्यिकी, कृषि समेत अन्य विभागों के ब्लॉक स्तर पर तैनात सहायक विकास अधिकारियों को प्रशासक बनाने की तैयारी चल रही थी। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को उम्मीद थी कार्यकाल खत्म होने से पहले नई व्यवस्था की तस्वीर साफ हो जाएगी लेकिन, अभी तक इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए जबकि कार्यकाल खत्म होने में महज तीन दिन ही शेष बचे। वहीं, डीपीआरओ का कहना है आदेश जारी होने का इंतजार किया जा रहा।
प्रधानों को जमा करना होगा बस्ता
25 दिसंबर को कार्यकाल खत्म होने के बाद ग्राम प्रधानों का अपना बस्ता पंचायती राज विभाग में जमा करना होगा। इसके बाद वह कोई भी वित्तीय एवं प्रशासनिक कामकाज नहीं निपटा सकेंगे। बता दें, निर्वाचित होने के बाद ग्राम प्रधानों को पंचायती राज विभाग की ओर से एक बस्ता दिया जाता है, जिसमें उनसे संबंधित सभी प्रकार के अभिलेख समेत वित्तीय लेनदेन के लिए डोंगल, स्वच्छ भारत मिशन में इस्तेमाल होने वाली चेकबुक समेत अन्य समाग्री होती है। बस्ता जमा होते ही प्रधान का डोंगल डि-एक्टिवेट कर दिया जाएगा।
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मार्गदर्शक मंडल में शामिल होंगे ग्राम प्रधान
कार्यकाल खत्म होने के साथ ही ग्राम प्रधान एवं निर्वाचित प्रतिनिधियों का दखल खत्म हो जाएगा लेकिन, पंचायत का कामकाज संचालित करने को एक समिति गठित की जाएगी। इसमें सचिव समेत ग्राम प्रधान शामिल रहेंगे हालांकि इसके पास वित्तीय अधिकार नहीं होंगे। नई पंचायत गठित न होने तक समिति पंचायत को सलाह देने का काम करेगी।
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