झांसी। ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों का प्रस्ताव तैयार कराने के लिए ग्राम पंचायत विकास योजना जीपीडीपी के तहत दो खुली बैठक अनिवार्य तौर पर करानी होगी। अक्तूबर से जनवरी के बीच यह बैठक आयोजित करनी होगी। इसके जरिए पारित होने वाले प्रस्ताव ही प्रशासनिक एवं वित्तीय स्तर पर मंजूर किए जाएंगे।
यह नई प्रक्रिया कई ग्राम पंचायतों में मनमाने तरीके से प्रस्ताव तैयार करने को लेकर आ रही शिकायतों को देखते हुए अपनाई जा रही। अमूमन ग्राम पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार करने में सर्वाधिक विवाद सामने आते हैं। ग्राम प्रधान एवं सचिव पर मिलीभगत से मनमाने प्रस्ताव तैयार करने के आरोप लगते हैं। ऐसे भी कई मामले आए जिनमें कार्य हुए बिना भुगतान हो गया। इन्हीं गड़बड़ियों को खत्म करने एवं ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने की खातिर केंद्र सरकार ने जीपीडीपी की शुरूआत की। इसके जरिए ग्राम पंचायतों को खुली बैठक बुलाना जरूरी कर दिया गया। अब इन्हीं बैठकों में साल भर में कराए जाने वाले विकास कार्य तय होंगे। हालांकि बाद में कुछ कार्य जोड़े भी जा सकेंगे। बैठक में तय योजनाएं ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड होंगी। अपलोड होने वाली योजनाओं को ही वित्तीय एवं प्रशासनिक मंजूरी मिल सकेगी। इसके पहले मिशन अंत्योदय के जरिए प्रत्येक पंचायत की रैंकिंग भी तय की जानी है। जो पंचायत इसमें पीछे होंगी वहां इससे संबंधित कार्य कराए जाएंगे। डीपीआरओ जगदीश राम का कहना है कि सभी ग्राम पंचायतों को इसके लिए आदेश दे दिए गए हैं। कुछ ग्राम पंचायतों ने समय भी तय कर लिया है।
खुली बैठक में शामिल होंगे 12 से अधिक महकमे
जीपीडीपी के तहत आयोजित होने वाली खुली बैठकों में न सिर्फ ग्राम पंचायत के सदस्यों की उपस्थिति जरूरी होगी बल्कि इसमें 12 से अधिक महकमों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी आवश्यक है। इनमें पंचायती राज विभाग के साथ ग्राम्य विकास विभाग, ग्रामीण आजीविका मिशन, राजस्व विभाग, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार, चिकित्सा शिक्षा, कृषि, दिव्यांग कल्याण, दुग्ध विकास, ग्रामीण अभियंत्र इकाई, सामाजिक वानिकी, लघु सिंचाई, लघु एवं मध्यम उद्योग व भूमि विकास आदि विभागों को भी शामिल होना होगा।