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लैरिंगो स्कोप खरीदने को मिली शासन की हरी झंडी

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झांसी। कई बार पत्राचार करने के बाद आखिरकार महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को शासन ने लैरिंगो स्कोप खरीदने की अनुमति दे दी है। कोरोना वायरस के चलते इस मशीन की बेहद जरूरत थी। अनुमति नहीं मिलने पर कॉलेज प्रशासन ने एनेस्थीसिया विभाग का लैरिंगो स्कोप आइसोलेशन वार्ड में रखवा दिया गया था। कोरोना वायरस के चलते मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। कई कोरोना संदिग्ध मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होती है। ऐसे में डॉक्टर उनकी सांस की नली में ट्यूब डालते हैं। यह ट्यूब वीडियो लैरिंगों स्कोप में देखकर डाली जाती है। इससे डॉक्टर को मरीज से संक्रमण फैलने का खतरा कम रहता है। चूंकि, आइसोलेशन वार्ड की किसी भी मशीन अथवा वस्तु का उपयोग दूसरी जगह पर नहीं किया जा सकता है। ऐसे में इस वार्ड के लिए अलग से वीडियो लैरिंगो स्कोप की जरूरत थी। अमर उजाला ने यह मामला उठाया तो कॉलेज प्रशासन ने समस्या का समाधान करने के लिए एनेस्थीसिया विभाग के लैरिंगो स्कोप को आइसोलेशन वार्ड में रखवा दिया। अब यह मशीन किसी अन्य विभाग में मरीज के उपचार के लिए उपयोग नहीं की जाएगी। ऐसे में यदि इमरजेंसी में कोई गंभीर मरीज आता है और उसको सांस लेने में परेशानी होती है तो नली में ट्यूब डालने में डॉक्टरों को परेशानी होगी। यह समस्या भी अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। अब चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय से मेडिकल कॉलेज को लैरिंगो स्कोप खरीदने की अनुमति दे दी है। इससे कॉलेज प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है।
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