राम के समय से हैं महाराष्ट्र और उप्र के संबंध
झांसी। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के संबंध राम के समय से हैं। भगवान राम वनवास बिताने अवध से पंचवटी यानी नासिक गए थे। इतना ही नहीं, वाराणसी के शिव मंदिर के मुख्य पुजारी ने ही वीर शिवाजी का राज्याभिषेक किया था। यह बात उन्होंने बृहस्पतिवार को प्राचीन गणेश मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में कही। यहां उन्होंने मंदिर में बने नवनिर्मित भक्त निवास भवन का उद्घाटन किया। साथ ही इसके निर्माण में सहयोग करने वाले दानदाताओं को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने झांसी को एक ऐसी नगरी बनाने पर भी जोर दिया जहां सैलानी रानी के किले, महल, तालाब और इस गणेश मंदिर को देखने के लिए खिंचे चले आएं।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश से अधिक दुनिया के सिर्फ तीन देशों की जनसंख्या है। ये इस प्रदेश की विशालता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मंदिर में बाहर से आने वाले लोगों के रहने की व्यवस्था की जा रही है, ये पर्यटन की दृष्टि से सराहनीय कदम है। उन्होंने बताया कि उनका राज्यपाल का कार्यकाल मात्र एक महीने बचा है। ऐसे में उनका झांसी के इस पवित्र मंदिर में आना उनके लिए बेहद सौभाग्य की बात है। उन्होंने लक्ष्मीताल के बीचोंबीच रानी की प्रतिमा स्थापित करने की महापौर की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके बचे हुए कार्यकाल में जो भी प्रस्ताव उनके पास आएगा, उस पर तुरंत आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
राज्यपाल ने झांसी के निवासियों को धन्यवाद दिया देते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास रानी झांसी के आदर्शों को देश, प्रदेश व विश्व के कोने -कोने में फैलाने में सफल साबित होंगे। विश्व पर्यटन मानचित्र में झांसी का नाम होगा।
इस मौके पर मंच पर महापौर रामतीर्थ सिंघल, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति जेवी वैशंपायन व महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर मौजूद रहे। जबकि, सभागार में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे, आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति अरविंद दीक्षित समेत नगर निगम के उपसभापति अनिल सोनी, भाजपा महानगर अध्यक्ष प्रदीप सरावगी, व्यापारी नेता संजय पटवारी, निरंजन धुलेकर, समीर तिवारी, राघव इंदापुरकर, अतुल किलपन, पीयूष रावत, शील कोपरा, डा. एसआर गुप्ता, अरविंद ओझा, शालिगराम राय, सुधीर सिंह, महारानी लक्ष्मीबाई बालिका इंटर कालेज के प्रधानाचार्य अरविंद ओझा आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन उज्ज्वल देवधर ने किया। आभार राहुल खांडेकर ने जताया।
मराठी में बोले राज्यपाल
राज्यपाल ने अपने उद्बोधन की शुरुआत में पूछा की कि वे मराठी में बोलें या हिंदी में, इस पर वहां मौजूद महाराष्ट्र समाज के लोगों ने उनसे मराठी में बोलने का आग्रह किया। इसके बाद राज्यपाल पच्चीस मिनट से अधिक समय तक बोले। उनका पूरा उद्बोधन मराठी में रहा। उन्होंने महाराष्ट्र समाज के लोगों को सलाह दी कि मराठी भाषा के संरक्षण के लिए मराठी परिवारों में अनिवार्य रूप से मराठी भाषा में बोलने आदत डाली जाए। इस दौरान उन्होंने बताया कि देश का पहला संगीत विश्वविद्यालय लखनऊ में महाराष्ट्र से आए प्रसिद्ध संगीतज्ञ भातखंडे जी ने ही खोला था। ये देश को एक अनमोल भेंट थी। मराठी गीत रामायण के रचयिता स्व. मादगुलकर और प्रसिद्ध गायक स्व. सुधीर फड़के ने गीत के रूप में पूरी रामायण का महाराष्ट्र ही नहीं पूरे देश को अनुपम उपहार दिया। उन्होंने इच्छा जताई कि झांसी में उक्त दोनों महानुभावों के पुत्रों को आमंत्रित कर सम्मान किया जाए, अन्य प्रदेशों में भी ये किया गया है।
सोने वाले का भाग्य भी सोता है
राज्यपाल राम नाईक ने अपनी पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का चिक्र करते हुए कहा कि इसमें उन्होंने मनुष्य को निरंतर चलते रहने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जो सोया है, उसकी किस्मत भी सोती है। जो खड़ा होता है, उसकी किस्मत भी खड़ी हो जाती है और जो चलता है, उसकी किस्मत भी चलती है। इसलिए प्रगति के लिए निरंतर चलते रहना जरूरी है।
मांगा झांसी का राजदंड
राज्यपाल के आगमन पर महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर ने स्वागत भाषण पढ़ा, जिसमें उन्होंने गणेश मंदिर का इतिहास बताया। साथ ही महाराष्ट्र समाज के लोगों के उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने राज्यपाल से आग्रह करते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई की तलवार और झांसी राज्य का राजदंड ग्वालियर के संग्रहालय में है। इसे झांसी लाया जाना चाहिए। वहीं, महाराष्ट्र समाज की ओर से राज्यपाल का हैलीपैड पर स्वागत संजय तलवलकर व दिनेश पाठक ने किया। मंदिर के द्वार पर लक्ष्मी महिला समाज की अध्यक्ष अर्चना नाफड़े, संगीता जोशी, मनीषा खानवलकर, सुनीता देवधर, प्रियंका चांदोरकर ने मंगल तिलक कर राज्यपाल का स्वागत किया।