महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को असाध्य रोगियों के इलाज के लिए 60 लाख रुपये मिल गए हैं। बजट मिलने से किडनी रोगियों को बड़ी राहत मिली है। उनकी डायलिसिस जारी रहेगी। इसके अलावा अन्य बीमारियों की दवाएं भी खरीदी जा सकेंगी। इससे पहले भी मेडिकल कॉलेज को 60 लाख रुपये दिए गए थे।
मेडिकल कॉलेज में 85 असाध्य रोगी पंजीकृत हैं। कुछ दिन पहले ही असाध्य रोगियों का बजट खत्म हो गया था। हालांकि, जब बजट का पैसा खत्म होेने वाला था, तब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शासन को पत्र लिखकर बजट की मांग कर दी थी। कॉलेज प्रशासन ने आरोग्य निधि से भी असाध्य रोगियों के लिए बजट मांग लिया था। अब शासन ने मेडिकल कॉलेज को असाध्य रोगियों के इलाज के लिए 60 लाख रुपये दे दिए हैं। चूंकि, सबसे ज्यादा असाध्य रोगी किडनी के मरीजों के हैं और डायलिसिस के लिए उन्हें फ्लूड की जरूरत होती है। हर मरीज की डायलिसिस पर महीने में 30 से 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में किडनी रोगियों को सबसे ज्यादा राहत मिली है। बजट नहीं मिलने से उनकी डायलिसिस रुक भी सकती थी। बजट मिलने के बाद कॉलेज प्रशासन ने डायलिसिस फ्लूड और दवाओं के खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
ये हैं असाध्य रोग
असाध्य रोगों में लिवर, किडनी, कैंसर, हृदय रोगों के साथ-साथ चिकिनगुनिया, जापानी इंसेफिलाइटिस, डेंगू आदि मौसमी बीमारियां शामिल हैं। बीपीएल कार्ड धारक असाध्य रोगियों का मेडिकल कॉलेज में नि:शुल्क इलाज होता है। इसके लिए सरकार बजट देती है।
हार्ट अटैक के बाद 24 घंटे मुफ्त इलाज
असाध्य रोगियों के बजट से हार्ट अटैक के मरीजों पर भी पैसा खर्च किया जाता है। जिस मरीज को हार्ट अटैक पड़ता है, उसको भर्ती होने के बाद 24 घंटे तक नि:शुल्क इंजेक्शन, दवाएं आदि उपलब्ध कराई जाती हैं। इसमें बीपीएल कार्डधारक होने की शर्त नहीं है। सभी आय वर्ग के मरीजों को यह सुविधा मिलती है।
जल्द खरीदेंगे दवाएं
शासन ने असाध्य रोगियों के लिए 60 लाख रुपये दे दिए हैं। डायलिसिस फ्लूड, दवाओं की खरीद जल्द कर ली जाएगी। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस।