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Jhansi News: मन से डर निकालो...अच्छे नंबर मेरी मुट्ठी में हैं, कहने की आदत डालो

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झांसी। दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा आते ही कई छात्र-छात्राओं में इस बात का डर बैठ जाता है कि उन्हें कुछ याद नहीं हो रहा। उनके पेपर अच्छे नहीं होंगे। कोरोना काल के दौरान लिखने की आदत कम हो गई, पूरा पेपर नहीं कर पाएंगे तो अच्छे नंबर कैसे मिलेंगे...। ऐसे ही किसी डर से परेशान कई बच्चे इन दिनों मनोवैज्ञानिकों को फोन कर रहे हैं। मनोवैज्ञानिक बता रहे हैं कि परीक्षा देने वाले बच्चे सबसे पहले खुद को मोटीवेट करें कि अच्छे नंबर उनकी अपनी मुट्ठी में हैं। मन से इस डर को निकालें कि पेपर अच्छा नहीं कर पाएंगे।
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पूर्व मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. एलके सिंह और मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र झांसी के मनोवैज्ञानिक डॉ. मनीष का कहना है कि खुद को मोटीवेट करने से आप उत्साहित होंगे, मन और दिमाग एकाग्र होगा, इससे परीक्षा की तैयारी अच्छी होगी। जरूरत है तो बस मन से डर को निकालने की। डॉ. मनीष ने बताया कि केंद्र में इन दिनों हफ्ते में 10-15 केस आ रहे हैं। बच्चे फोन से काउंसलिंग ले रहे हैं। सबसे ज्यादा केस राइटिंग बिगड़ने, लिखने की आदत कम होने और लिखा हुआ भूल जाने के आ रहे हैं।
केस-1
यूपी बोर्ड 10वीं के एक छात्र ने काउंसलर को बताया है कि मुझे पढ़ा हुआ याद नहीं रहता है। मन लगाकर पढ़ता हूं लेकिन दिमाग में ये डर हमेशा बैठा रहता है कि मैं इसे याद नहीं रख पाऊंगा। मैं एग्जाम में क्या करूंगा, मैं बहुत परेशान हो रहा हूं।
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घर में बाकी भाई-बहनों के अच्छे नंबर आए थे। मेरे अच्छे नंबर नहीं आएंगे तो मुझे डांट पड़ेगी।
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केस-2
सीबीएसई की एक छात्रा बताती है कि उसकी राइटिंग बहुत खराब है। कोरोना काल के दौरान तो लिखने की आदत ही छूट गई थी। 10वीं में तो अच्छे नंबर आ गए थे। लेकिन, इस बार बहुत डर लग रहा है। राइटिंग खराब होगी और पूरा पेपर नहीं कर पाई तो नंबर अच्छे नहीं मिलेंगे। बहुत देर तक लिखने से मेरे हाथ में दर्द होने लगता है।
केस-3
यूपी बोर्ड 12वीं के एक छात्र का कहना है कि वह पढ़ने में अच्छा है। कोचिंग भी कर रहा है। लेकिन, मैथ विषय में उसे बहुत डर लग रहा है। सभी लोग कहते हैं कि 90 प्रतिशत से कम नंबर आए तो कॅरियर बेकार हो जाएगा। सबकी बात सुनकर मुझे डिप्रेशन होने लगा है, मैं परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रहा हूं।
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खुद को मोटीवेट करें, लिखा हुआ याद रहेगा
-मैं सब कुछ कर सकता हूं, ये मन ही मन दोहराकर खुद को मोटीवेट करें।
-प्रैक्टिकल विषयों की तैयारी अच्छी तरह करें, लिखित परीक्षा के लिए अपने नोट्स बनाकर पढ़ें।
-जो भी याद करें, उसे किताब बंद करके कुछ देर बाद कम से कम दो बार लिखें, लिखा हुआ याद रहेगा।
-ग्रुप स्टडी विषय को समझने का बेहतरीन जरिया है, अपने अच्छे दोस्तों के साथ बैठकर पढ़ाई करें।
-क्लास में जो पढ़ाया गया है, उसमें जो सवाल आपको नहीं याद हो रहे, उन्हें अलग लिखकर हर दो घंटे में पढ़े।
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बच्चे पर प्रतिशत व नंबरों का दबाव न डालें अभिभावक
-हर बच्चा हर विषय में पारंगत नहीं होता, इसलिए दूसरों से बच्चे की तुलना न करें।
-बच्चे को पढ़ा हुआ याद नहीं रहता तो उसके साथ बैठें और मोटीवेट करें कि बार-बार पढ़ने से जल्दी याद हो जाएगा।
-परीक्षा में अभी समय है। बच्चा किसी विषय में कमजोर है तो तुरंत स्कूल या कोचिंग की मदद लें, उसकी तैयारी में मदद करें।
-बच्चे पर 90-95 प्रतिशत नंबर लाने का दबाव न डालें, बेहतर है उसे अलग-अलग कॅरियर के बारे में गाइड करें।
-12वीं के बच्चों पर अनावश्यक इंजीनियरिंग, आईटी, मेडिकल आदि का दबाव न थोपे, आज कॅरियर बनाने के लिए कई बेहतर क्षेत्र हैं।
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