बुंदेलखंड में छुट्टा गायों की नस्ल बदलने के लिए केंद्र सरकार ने ‘गोकुल ग्राम योजना’ शुरू की है। इसके अंतर्गत जिला में किसी एक गांव का चयन किया जाएगा, जिसमें एक हजार गायें पाली जाएंगी। इसमें से 600 गायें अच्छी नस्ल और 400 गायें बुंदेलखंडी नस्ल की रहेंगी।
पहले चरण में झांसी में योजना शुरू की गई है। बाद में बुंदेलखंड के सभी जिलों में शुरू किया जाएगा। गायों के पालने पर आने वाले खर्च को पूरा करने के लिए उनसे घी और मक्खन तैयार कर बेचा जाएगा। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के आधार पर योजना शुरू होगी। केंद्र सरकार की इस योजना के अंतर्गत एक साल में 20 प्रतिशत छुट्टा जानवरों की नस्ल सुधार करनी होगी। जिला में ऐसे किसी एक गांव का चयन होगा, जहां गोचर भूमि सर्वाधिक होगी। देशी नस्ल थारपरकर व सहीवाल प्रजाति की गायें पालकर उनसे मिलने वाले घी और दूध को बेचकर गोकुल ग्राम का खर्च निकाला जाएगा।
‘सेक्स सीमन’ तकनीक से बछिया पैदा होंगी
‘सेक्स सीमन’ तकनीक से छुट्टा जानवरों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा, जिसमें सिर्फ बछिया पैदा होंगी। यह बछिया भी दुधारू होगी, जिससे पशुपालक अपने जानवर को छुट्टा नहीं छोड़ेंगे।
गाय के मूत्र का कारोबार होगा
गाय का मूत्र दवाओं में उपयोगी है। गोकुल ग्राम में गोमूत्र का व्यवसायीकरण होगा और इसे दवा के रूप में उपयोग होगा। इसके अलावा कंपोस्ट खाद, बायो गैस, मच्छर मार दवा, बायो पेस्टीसाइड्स, बायो फर्टिलाइजर तैयार किए जाएंगे।
सर्वे इसी महीने
इसी महीने में गांव का चयन करने के लिए सर्वे शुरू किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से छुट्टा जानवरों की नस्ल सुधारी जाएगी, जिससे पशुपालक अपने जानवर को छुट्टा नहीं छोड़ेंगे।
- डा. योगेंद्र सिंह
पशु चिकित्साधिकारी