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प्रसाद में होते हैं प्रभु के साक्षात दर्शन

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झांसी। गाय, माता - पिता व संतों की सेवा करने और आशीर्वाद लेने से आयु में वृद्धि होती है। इससे सुख - समृद्धि आती है। यह उद्गार लक्ष्मी गेट बाहर स्थित महाकाली विद्यापीठ प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण के छठवें दिन कथा व्यास आचार्य तारा तेजस्व शर्मा ने प्रकट किए।
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उन्होंने प्रसाद के प्रत्येक अक्षर का अर्थ बताते हुए कहा कि प्र से प्रभु, सा से साक्षात व द से दर्शन होता है। प्रसाद में प्रभु के साक्षात दर्शन होते हैं। महादेव सिर्फ जल और बेलपत्र चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने शिव - पार्वती विवाह के प्रसंग का मनोहारी वर्णन किया। इस दौरान महिला श्रद्धालु जमकर झूमीं। संचालिका गुरु माता अनामिका शर्मा समेत पूर्व मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, अरविंद वशिष्ठ, राहुल गुप्ता, विजय त्रिवेदी, गोपाल, ऋषिका, आकाश पांडेय, रामकुमार, रोहित, विकास आदि उपस्थित रहे। आभार आयोजन समिति के पीयूष रावत ने जताया।
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