फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुलजार नहीं हो सकीं हाट, ऑनलाइन लग रही बकरों की बोली

विज्ञापन
सीपरी बाजार में बकरीद के लिए आए बकरे को टहलाते बच्चे।
विज्ञापन
झांसी। कुर्बानी का त्योहार ईद उल अजहा एक अगस्त को मनाया जाएगा। ईद के बाद बकरीद पर भी कोरोना का साया पड़ रहा है। सख्ती के चलते इस बार बकरों की हाट अब तक नहीं लग सकी। जिस कारण कुछ कारोबारियों ने ऑनलाइन बकरों को बेचना शुरू कर दिया है। इस पर बाकायदा बकरों की फोटो, वीडियो व कीमत शेयर की जा रही है। खरीदारी भी हो रही है, लेकिन पिछले साल की तरह रफ्तार न मिलने के कारण कारोबारी खासे मायूस हैं।
विज्ञापन

कोरोना काल का असर इस बार ईद उल अजहा पर भी पड़ा है। कुर्बानी के बकरों की खरीद को लेकर मुस्लिम लोग बेचैन हैं। ईद उल अजहा से पहले झांसी में करीब दस स्थानों पर हाट सजती थी, लेकिन इस बार पूरी तरह सन्नाटा है। लोग अब तक बकरों की खरीद नहीं कर सके। अधिकांश लोगों ने लॉॅकडाउन की परेशानी के चलते इस बार कुर्बानी से भी दूरी बना ली है। कुछ ऐसे भी हैं, जो कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते खरीदारी नहीं कर रहे हैं। अब ईद में केवल पांच दिन शेष हैं। ऐसे में हाट लगने की संभावना भी अब नजर नहीं आ रही है।
ऐसे में कुछ कारोबारियों ने ऑनलाइन कारोबार शुरू कर दिया है। इसमें वाट्सएप का लिंक मुफ्त में उपलब्ध है। कोई भी इसका सदस्य बन सकता है। कारोबारियों के मुताबिक इन ग्रुपों में विक्रेता व खरीदार जुड़े हुए हैं। इनमें बकरों की फोटो व वीडियो डाली जा रही है। जिसके बाद संपर्क कर लेनदेन तय होता है। कारोबारियों के मुताबिक इस पर बकरे के बाजार पर काफी फर्क पड़ा है।
विज्ञापन

बकरों की कीमतों में खासी गिरावट
कोरोना की वजह से बकरों की कीमतों में खासी गिरावट आई है। अमूमन तौर पर ईद के मौके पर बकरों की कीमत काफी होती थी, लेकिन इस बार खरीदार न मिलने के कारण रेट कम हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार 25 से 30 फीसदी की गिरावट आई है। इस बार बकरों की कीमत 8 से 12 हजार रुपये तक है। साथ ही बकरों की मांग भी कम है। बकरे के साइज पर भी उसका का भाव निर्भर करता है।
बकरे की बिक्री कई कारोबारी ऑनलाइन कर रहे हैं। पहली बार बकरों को ऑनलाइन बेचने का तरीका अपनाया गया है। वाट्सएप पर कई ग्रुप बनाए गए हैं। इनमें बकरे की तस्वीर, वीडियो और कीमतों को शेयर किया जा रहा है। समूह का सदस्य जो बकरे को पसंद करता है, वह व्यापारी से संपर्क करता है। बकरे की जांच के बाद उसका सौदा हो रहा है।
- फारूख खान, बकरा कारोबारी
कोरोना का असर कुर्बानी पर भी रहेगा। ईद का समय नजदीक है, ऐसे में अब तक हाट भी नहीं लग सकी। जिले में साठ फीसदी मुस्लिम कुर्बानी करते थे। अब लोगों को पास रोजगार की कमी है। इस कारण कुर्बानी करने के लिए बजट गड़बड़ है। कम लोग ही कुर्बानी करेंगे, इसीलिए खरीदारी कम हो रही है।
विज्ञापन

- मुबीन कुरैशी, बकरा कारोबारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें