मुफ्ती मोहम्मद साबिर कासमी ने बताया कि अल्लाह पाक ने मुसलमानों पर पांच फज नाजिल किए हैं। इनमें जकात भी शामिल है। मुकद्दस रमजान में जकात दी जाती है। कुल माली हालत का ढाई फीसदी पैसा जकात के तौर पर दिया जाता है। मसलन सालाना आमदनी का ढाई फीसदी पैसे की जकात निकाली जानी फर्ज है। जकात ऐसे साहिबे माल पर फर्ज की गई है जिसके पास मौजूदा दौर में साढ़े सात तौला सोना व साढ़े बावन तौला चांदी है। उन्होंने बताया कि जकात देकर मुसलमान अपने माल व जान का सदका अदा करें। जकात फर्ज है तो फितरा वाजिब है। यह हर एक शख्स पर वाजिब है। फितरा के रूप में दो किलो 45 ग्राम गेहूं या इसकी कीमत अदा की जाती है। इसका भी रखें ध्यान रमजान के महीने में इफ्तार के बाद ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं। दिनभर के रोजे के बाद शरीर में पानी की काफी कमी हो जाती है। मर्दों को कम से 2.5 लीटर और औरतों को कम से कम 2 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। इफ्तार की शुरुआत हल्के खाने से करें। खजूर से इफ्तार करना बेहतर माना गया है। इफ्तार में पानी, सलाद, फल, जूस और सूप ज्यादा पिएं। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी।