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चार परीक्षकों से मांगा स्पष्टीकरण

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up board exam - फोटो : demo
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जिले में प्रयागराज बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं के जांचने के काम में तेजी बनी हुई है। नेशनल हाफिज सिद्दीकी इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की 95000 और राजकीय इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट की 65 हजार कॉपियां परीक्षकों द्वारा जांची जा चुकी हैं। डीआईओएस ने बताया कि चार परीक्षकों से कार्य में उदासीनता बरतने के कारण स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद कार्रवाई होगी।
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बीते दस मार्च से बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के जांचने का कार्य शुरू हुआ था। नेशनल हाफिज सिद्दीकी इंटर कॉलेज में आवंटित एक लाख 83 हजार उत्तर पुस्तिकाओं में हिंदी की 12984, उर्दू की 481, अंग्रेजी की 1293 सहित कई अन्य विषयों की कॉपियां जांची जा चुकी हैं। जीआईसी में इंटरमीडिएट की आवंटित एक लाख 13 हजार में से अब तक 65 हजार उत्तर पुस्तिकाओं की जांच हुई है। डीआईओएस डॉ. नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि तय समय में सभी कॉपियों की जांच हो जाएगी। उनके अनुसार जीआईसी में दो और नेशनल हाफिज सिद्दीकी इंटर कॉलेज के दो परीक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद बोर्ड द्वारा कार्रवाई होगी।


विद्यार्थी हो गए अब जागरूक
इस बार हाईस्कूल व इंटर के विद्यार्थी भी बेहद जागरूक हो गए हैं। कई परीक्षकों ने बताया कि हर साल कई परीक्षार्थी अच्छे नंबर देने के लिए मार्मिक अपील करते थे। इनमें शादी कार्यक्रम में ज्यादा व्यस्त रहना, घर में कोई घटना होना आदि रहता था। इसके अलावा शायरी और कविताएं भी लिखते थे लेकिन इस बार ऐसा कुछ लिखा नहीं आ रहा है। इसके अलावा कई विद्यार्थी कॉपी में नोट भी चिपका देते थे, जो इस बार नहीं नजर आए हैं।
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बोर्ड की नहीं सुन रहे केंद्र व्यवस्थापक
केंद्र व्यवस्थापक बोर्ड के निर्देशों की भी अवहेलना कर रहे हैं। इनकी लापरवाही से कक्ष निरीक्षकों के पारिश्रमिक का भुगतान नहीं हो पा रहा है। अब तक 63 केंद्र व्यवस्थापकों में 23 ने ही पारिश्रमिक भुगतान के लिए बिल दिए हैं। डीआईओएस ने बताया कि परीक्षा कार्य में शामिल बाह्य केंद्र व्यवस्थापकों, अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापकों, कक्ष निरीक्षकों, बंडल वाहकों आदि को भुगतान के लिए शासन ने धनराशि आवंटित की है। सभी केंद्र व्यवस्थापकों को दो मार्च तक देयक उपलब्ध कराने के निर्देश थे लेकिन वह उपलब्ध नहीं कराए गए। इन्हें एक बार फिर सूचित किया गया है। अगर केंद्र व्यवस्थापक देयक नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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