झांसी। कोरोना वायरस से लड़ाई में इन दिनों अधिकांश परिवार आयुर्वेद का सहारा लिए हुए हैं। ऐसे में मार्च तक जो गिलोय का पौधा 15 से 25 रुपये तक बिकता था। वह अब 80 से 100 रुपये का हो गया है। अन्य जड़ी बूटियों के दाम भी बढे़ हुए हैं।
कोरोना वायरस एवं मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए कई परिवार इन दिनों आयुर्वेद चिकित्सकों की सलाह पर काढे़ के बतौर गिलोय का उपयोग कर रहे हैं ताकि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके । बाजार में भी कई ब्रांडेड आयुर्वेदिक कंपनियों ने गिलोय की गोलियों को आकर्षक पैकिंग में उतार दिया है। ऐसे में अब जड़ी बूटी और किराना की दुकानों से लेकर पौधशालाओं तक गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी के बीज और हल्दी की मांग व्यापक रूप से बढ़ गई है। पौधा विक्रेता राजाराम के अनुसार गिलोय के पत्ते के साथ ही लोग उसका तना भी उपयोग करते हैं। नीम के पेड़ वाले गिलोय की व्यापक मांग है। पौधा विक्रेता लक्ष्मी नारायण के अनुसार प्रतिदिन 20 से 25 पौधे गिलोय के बिक जाते हैं। कई लोग बुकिंग भी करा जाते हैं।
पान के पत्ते की तरह है गिलोय का पत्ता
गिलोय का पत्ता पान के पत्ते की तरह होता है। आयुर्वेद में इसे अमृता, चक्रांगी, गुडुची आदि नाम दिए गए हैं। यह बुखार की औषधि मानी जाती है। गिलोय की बेल कहीं भी पनप जाती है। खास बात यह है कि जिस वृक्ष को यह आधार बनाती है, उसके गुण भी इसमें समाहित हो जाते हैं। नीम पर चढ़ी गिलोय को श्रेष्ठ माना जाता है।
हल्दी एवं अश्वगंधा की भी बढ़ी मांग
गिलोय के साथ ही वर्तमान में हल्दी, दालचीनी, तुलसी के बीज और अश्वगंधा की भी मांग बढ़ी हुई है। हल्दी मार्च तक 90 रुपये प्रति किलो थी, जो अब 120 रुपये हो गई है। झांसी में अधिकांश हल्दी निजामाबाद की बिकती है। आयुर्वेद में इसका बड़ा महत्व है। यह कफ, खांसी सहित कई बीमारियों के इलाज में काम आता है। यह एक एंटीसेप्टिक की तरह उपयोग में भी आता है।