फूलों के बुके नहीं, अब गिलोय का पौधा होगा भेंट
झांसी। अब आयुष मंत्रालय के सभी सरकारी कार्यक्रमों में आयुर्वेद की अमृता यानि गिलोय का पौधा भेंट में दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस पौधे को साल 2018 में राष्ट्रीय पौधा घोषित कर रखा है। यह पौधा बुखार सहित कई रोगों के इलाज में प्रमुखता से काम आता हैं।
आमतौर पर आयुष मंत्रालय के सभी सरकारी कार्यक्रमों में रंग बिरंगे देशी - विदेशी फूलों के बुके भेंट करने का प्रचलन है। लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया गया हैं। बेल के आकार वाले गिलोय पौधे में कई औषधीय गुण होने और आम तौर पर देश के सभी जगहों में पाए जाने के कारण इसे व्यापक महत्व केंद्र सरकार द्वारा दिया गया है। केंद्र सरकार ने साल 2018 में इसे राष्ट्रीय पौध घोषित किया है। अब आयुष मंत्रालय के सरकारी आयोजनों में बुके की जगह गिलोय का पौध भेंट किया जाएगा। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ. अनिल मंगल के अनुसार राष्ट्रीय पौधा गिलोय में कई औषधीय गुण है, जिसके पत्ते हृदय के आकार के है और पेड़ों पर आसानी से चढ़ जाता है। इसे घर की सजावट में भी लाया जा जाता है। यह प्रत्येक मौसम में फलता फूलता है। गिलोय क ी बेल में आकर्षक लाल फूल और धागे की तरह जडे़ जमीन की ओर जाती है, जो काफी आकर्षित लगता है। इस बेल का उपयोग बुखार, डायबिटीज, लीवर के रोगों को मिटाने में काम आता है।
कई नाम है गिलोय के
कई रोगों में रामबाण का काम करने वाले गिलोय को कई नामों से जाना जाता है। इनमें गुड्च, अमृता, जीवंतिका, छिन्नरूहा, चक्र लक्षणिका, वत्सादिनी और वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया है। आयुर्वेद में इसकी पहचान बुखार की प्रभावी औषधि के रूप में हैं।