माध्यमिक, बेसिक और उच्च शिक्षा क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के उद्देश्य से मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) ने देश भर के लिए नई शिक्षा नीति तैयार करने की पहल की है। जन-जन की भूमिका के लिए ग्राम स्तर तक के लोगों के सुझावों को नीति निर्धारण में शामिल किया जाएगा। नीति तैयार करने से पूर्व यह समझने की भी कोशिश रहेगी कि अभी तक बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा व्यवस्था में क्या खामियां थीं। शिक्षा के उत्थान की दिशा में मोदी सरकार का यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है।
भारत सरकार के एचआरडी मंत्रालय की ओर से सभी प्रदेशों की सरकारों को नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिए पत्र भेजा जा चुका है। यूपी में शिक्षा सचिव ने संयुक्त सचिव को इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। वहीं, निदेशालय स्तर पर शिक्षा निदेशक, मंडल स्तर पर उच्च शिक्षा अधिकारी, जिला स्तर पर डीएम को नोडल प्रभारी बनाया गया है।
नगर स्तर पर स्थानीय निकायों के अधिशासी अधिकारी, जिला पंचायत स्तर पर अपर मुख्य विकास अधिकारी तथा ब्लॉक स्तर पर बीडीओ नोडल प्रभारी होंगे। इनके अधीन ही अन्य अधिकारियों की समिति कार्य करेगी। नीति के अंतर्गत ब्लॉक स्तर से सर्वे शुरू होगा। समस्त नोडल अधिकारी अपने क्षेत्र में उच्च शिक्षा अधिकारी द्वारा भेजी गई पत्रावली पर जनसामान्य, जनप्रतिनिधियों आदि के विचार लेंगे। इसके बाद उनके विचारों का निष्कर्ष अपने स्तर से भारत सरकार की वेबसाइट mygov.in पर अपलोड करेंगे। सर्वे का काम पंद्रह सितंबर तक पूर्ण हो जाएगा। भारत सरकार सभी प्रदेशों से प्राप्त निष्कर्षों का सारांश निकालकर नई शिक्षा नीति तैयार करेगी। यदि कोई भी व्यक्ति नीति निर्धारण में अपनी भूमिका अदा करते हुए कोई सुझाव देना चाहता है तो वह सीधे वेबसाइट पर जाकर अपनी बात साझा कर सकता है।
यह हैं प्रमुख बिंदु
- क्या आपके ब्लॉक में कॉलेज हैं या नहीं, नहीं हैं तो क्या कारण हैं?
- कॉलेजों को इनके निष्पादन में सुधार के लिए किस प्रकार की स्वायत्तता दी जानी चाहिए?
- क्या यह वांछनीय है कि आवश्यकता वाले बच्चों के लिए छूट के साथ शुल्क बढ़ाना चाहिए?
- क्या राज्य कॉलेजों में अवसंरचना की कमी, गुणवत्ता की कमी का मुख्य कारण है?
- क्या नियोजनीयता बढ़ाने को कौशल आधारित कोर्सों को नियमित पाठ्यक्रमों का भाग बनाना चाहिए?
- ऐसा कौन सा उपाय है, जिनसे कौशल को उच्चतर शिक्षा के साथ एकीकृत किया जा सके?
- क्या किसी भी चरण में प्रवेश व किसी भी सेमेस्टर के अंत में उसे अस्थायी रूप में छोड़ने की अनुमति दी जाए?
- क्या कॉलेज की स्थापना या एक पॉलीटेक्निक की स्थापना अधिक लाभदायी होगी या दोनों की आवश्यकता है?
- यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि लड़कियां कॉलेज अथवा पॉलीटेक्निक में प्रवेश लेती हैं?
- छात्रावास, छात्रवृत्ति, सुरक्षा का आश्वासन में से कौन सा घटक लड़कियों की भागीदारी में सुधार ला सकता है?
- उन शिक्षकों के विरुद्ध जो अध्यापन कार्य नहीं करते, प्रस्तावित कार्रवाई में क्या सुझाव हैं?
- बहुलवादी समाज में भाषाओं की भूमिका और महत्ता के बारे में छात्रों को शिक्षित करने को भाषा के जरिए पाठ्यचर्यों में संशोधन का सुझाव दें।
चित्रकूट एवं झांसी मंडल के प्रत्येक जिले के एक राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य को नोडल प्रभारी नियुक्त कर जिला स्तरीय समिति का गठन करा दिया गया है। समिति ही लोगों से प्रश्नावली के आधार पर सुझाव लेगी। माध्यमिक स्तर पर डीआईओएस और बेसिक स्तर पर बीएसए के पास यह जिम्मेदारी है।
- डॉ. सीएस यादव, उच्च शिक्षा अधिकारी।