बंगरा। गौरैया मेला महोत्सव का शुभारंभ एक जनवरी से 10 जनवरी तक किया जा रहा है। जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
ग्राम पंचायत गैराहा में स्थित गौरैया मंदिर झांसी-खजुराहो राष्ट्रीय राजमार्ग से उत्तर पूर्व दिशा में लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस प्राचीन चंदेल कालीन मंदिर के प्रांगण में एक जनवरी से 10 जनवरी तक प्रतिवर्ष भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।
गौरैया मेला महोत्सव की शुरुआत 1960 में हुई थी। 64 वर्षों से लगातार मेला लगता आ रहा है। इस बार 65 वां मेला लग रहा है।
इस मंदिर प्रांगण में माता गौरी एवं भगवान शिव अपने दिव्य स्वरूप में स्थित हैं। यहां मंदिर में सदियों पुराने प्राचीन शिवलिंग मौजूद है तथा मंदिर की भव्यता एवं सुंदरता अपने आप में एक अलौकिक है। इतिहासकारों ने बताया कि प्राचीन समय में संवत् 800 के लगभग राजा कीर्तिवर्मन के राजकाल में मंदिर का निर्माण हुआ था।
इतिहासकार एवं प्रवक्ता डॉ. सतेंद्र सिंह ने बताया कि गैराहा शिव मंदिर पर लगने वाले मेले में बुंदेलखंड की संस्कृति की अद्भुत झांकी देखने को मिलती है। संवाद
गौरी माता और शिव मंदिर की कई किवदंतियां हैं और कई रहस्य हैं। - अरुण सिंह तोमर, जिला महामंत्री, भाजपा
मेला महोत्सव को सभी लोग उत्सव के रूप में मनाते हैं और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। - हरचरण लिटौरिया, मेला समिति अध्यक्ष
ऊंचे पहाड़ पर बना गौरी मां का मंदिर सिद्ध स्थल है, पहाड़ के आधे भाग स्थल पर बना शिव मंदिर भी अनूठी परंपरा से लेकर कई रहस्य से घिरा है। - शिवशंकर सिंह
पहाड़ पर बने गौरी मंदिर एवं शिव मंदिर पर कई जरूरी जनहितकारी सुविधाओं की कमी है। - नरेंद्र सिंह