सफाई के लिए बनाए गए सिस्टम पर न तो नगर निगम के अधिकारी चौकन्नी नजर रखते हैं और न ही लोगों की इसकी चिंता है। डोर-टू-डोर कलेक्शन योजना के तहत लोग निजी कंपनियों की टीम को कचरा देने के बजाय गलियों, नालियों और सड़कों पर फेंक देते हैं। यही कारण है कि गंदगी फैली रहती है। बाजारों में तो हालात ज्यादा खराब हैं।
नगर निगम में कूड़ा उठाने के नाम पर हर महीने 29 लाख रुपये का डीजल खर्च हो रहा है। साथ ही दो हजार सफाई कर्मचारियों के वेतन मद में हर महीने तीन करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा रहा है। खास बात यह कि 60 में 45 वार्ड क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का जिम्मा निजी कंपनियों के पास है। इसके बावजूद न तो नियमित सफाई हो रही है और न ही कूड़ा उठाया जा रहा है। इसके लिए पब्लिक भी किसी हद तक जिम्मेदार है। कई लोग न तो यूजर चार्ज देते हैं और न ही कूड़ा तय जगह पर फेंकते हैं। सफाई के लिए आठ सौ हाथ ठेला गाड़ियां हैं। इसके अलावा ट्रैक्टर, जेसीबी, रोबोट, डंपर प्लेसर, छोटे डंपर प्लेसर, डंपर टिपर और तिपहिया वाहन भी हैं। इन गाड़ियों पर प्रति माह करीब 29 लाख रुपये का डीजल खर्च होता है। ये गाड़ियां कागजों पर तो पर्याप्त चक्कर लगाती हैं लेकिन हकीकत में यदि ऐसा होता तो शायद शहर के किसी गली-मोहल्ले में गंदगी नजर न आती।
यूजर चार्ज नहीं मिल रहा
डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का यूजर चार्ज चालीस रुपये प्रति परिवार तय किया गया है। लेकिन, ज्यादातर परिवार यह चार्ज नहीं दे रहे हैं। सफाई निरीक्षक मुहल्लेवासियों का चालान काट रहे हैं। छह सौ चालान हर महीने काटे जा रहे हैं। फिर भी यूजर चार्ज नहीं मिल रहा।
गलियों और नालियों में फेंक रहे
नगर निगम की ओर से कराए गए सर्वे से पता चला है कि 63 परिवार अभी भी गलियों, खाली प्लाटों, नालियों या सड़कों पर कचरा फेंक रहे हैं। ये न तो कचरा कलेक्शन वालों को कूड़ा देते हैं और न ही यूजर चार्ज जमा करते हैं।
हाउस टैक्स के साथ जोड़ा जाएगा पैसा
कचरा कलेक्शनका यूजर चार्ज अब हाउस टैक्स में जोड़कर बिल भेज दिया जाएगा। यूजर चार्ज एक साल का एक मुश्त वसूला जाएगा। यह प्रस्ताव नगर निगम सदन की बैठक में रखा जाएगा। इस पर सहमति बनने की उम्मीद है।
एजेंसियों ने बांटे डस्टबिन
शहरवासियों को प्रेरित करने के लिए कचरा कलेक्ट कर रही एजेंसियों ने मुहल्ले वालों को डस्टबिन बांटे हैं। एक डस्टबिन में सूखा और प्लास्टिक कचरा, जबकि दूसरे डस्टबिन में गीला, सब्जी और भोजन संबंधी कचरा इकट्ठा किया जाता है।
एक एजेंसी बना रही खाद
पांच एजेंसियां कचरा कलेक्ट कर रही हैं। इसमें एक एजेंसी कचरा से खाद बना रही है, जबकि चार एजेंसियां वार्डों से कचरा कलेक्ट कर पंचवटी स्थित डंपिंग साइट पर डाल रही हैं।
रोज ढाई सौ टन कचरा
शहर में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 385 ग्राम कचरा फैलाता है। इस हिसाब से वर्तमान में 250 टन प्रतिदिन कचरा निकल रहा है। अनुमान है कि कचरा 2021 में बढ़कर 270 टन और 2031 में 310 टन हो सकता है।
कंटेनर में नहीं डालते गंदगी
ज्यादातर लोग कंटेनर में कचरा नहीं डालते, बल्कि उसके पास डालकर चले जाते हैं। छुट्टा जानवर कचरा फैला देते हैं। यदि नागरिक स्वयं इसको समझें तो गंदगी की समस्या हल हो सकती है।
खूब चलता है तेल का खेल
कचरा उठाने वाली गाड़ियों को तीन चक्कर लगाना अनिवार्य है, लेकिन शायद ही कोई गाड़ी हो जो इस नियम का पालन करती हो। इस तरह डीजल की चोरी खूब हो रही है। इस पर नजर रखने के लिए सभी कचरा गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम लगाया गया था, लेकिन यह कब और कैसे हट गया, कोई बताने वाला नहीं है।
दुकानदार नहीं मानते
जहां मार्केट हैं, केवल वहीं पर कचरा और गंदगी की समस्या है। दुकानदारों से कई बार कहा गया है कि दुकान बंद करते समय सफाई करके कचरा बाहर डाल दें, लेकिन फर्क नहीं पड़ा। सुबह सड़क पर झाडू लग जाने के बाद दुकानें खुलती हैं और दुकानदार सफाई करके कचरा बाहर डाल देते हैं। यदि लोग स्वयं जागरूक हो जाएं तो गंदगी की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।
- डा. राकेश बाबू
नगर स्वास्थ्य अधिकारी