झांसी। गगनभेदी जयकारे, आसमान में उड़ाते रंग-गुलाल एवं नम आंखों के बीच
श्रद्धालुओं ने बृहस्पतिवार को भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन महानगर
के विभिन्न जलाशयों में किया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों एवं बैंड की धुन से
वातावरण गुंजायमान रहा। वहीं कई स्थानों पर लगे पंडालों में विराजमान गणेश
प्रतिमाओं को अनंत चतुर्दशी पर विसर्जित किया जाएगा।
प्रात: विभिन्न
गणेश प्रतिमा पंडालों में हवन-पूजन, कन्या भोज सहित अन्य कार्यक्रम हुए।
इसके पश्चात रंग-बिरंगे पुष्पों व गुब्बारों से युक्त ट्रैैक्टर व ठेलों पर
बनाए सिंहासनों पर भगवान विनायक की मनोहारी प्रतिमाएं विराजमान की गईं।
आरती कर ‘एक दो तीन चार गणपति की जय जयकार’ ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे
के बीच शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में युवा, महिलाएं व बच्चे बैंड
बाजों व ढोल की धुन पर नृत्य कर रहे थे। नगर के विभिन्न क्षेत्रों में शोभा
यात्राएं निकालने के पश्चात प्रतिमाएं लक्ष्मी तालाब, पहूंज बांध, ओरछा
सहित विभिन्न जलाशयों में विधिवत रूप से विसर्जित की गईं। इस दौरान कई
स्थानों पर मंगलमूर्ति की लोगों ने आरती वंदना कर आशीष मांगा। वहीं कई
समाजसेवी संगठनों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। इस दौरान
कई स्थानों पर भंडारे भी हुए।
इन मंदिरों से निकले विमान
जल
विहार के लिए चौधरयाना स्थित महंत जी का मंदिर, हयारण समाज का श्रीराम
जानकी मंदिर, श्रीलूला बाबा का मंदिर, नामदेव समाज का श्रीबांके बिहारी
मंदिर, कुष्टा समाज का श्रीराम जानकी मंदिर, खटीक समाज का श्रीराम जानकी
मंदिर, कोरी समाज का श्रीराम जानकी मंदिर, कुशवाहा समाज का श्रीराम जानकी
मंदिर, चौरसिया समाज का श्रीराम जानकी मंदिर, मैथिल समाज का श्रीराधा कृष्ण
मंदिर, शाक्यवार कोरी समाज का श्रीराम जानकी मंदिर, रविदास समाज का
श्रीराधा कृष्ण मंदिर, झा समाज का श्री राम जानकी मंदिर, खुशीपुरा स्थित
श्रीराधा कृष्ण मंदिर, सागर गेट स्थित श्रीराधा कृष्ण मंदिर व बाहर
बड़ागांव गेट स्थित श्रीराम जानकी मंदिर के विमान निकले।
चाचर व अखाड़ों में युवाओं ने किया प्रदर्शन
गंधीगर
का टपरा इस बार भी चाचर नृत्य कला एवं युवाओं के शस्त्र कला कौशल का गवाह
बना। विमानों के जल विहार को भ्रमण करने के दौरान स्वर्णकार समाज, अग्रवाल
समाज भईया साहब की चाचर व मोहन लाल जी की चाचर के युवा, बुजुर्ग व बाल
सदस्यों ने नगड़ियों सहित बुंदेली वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि व लयबद्ध
होकर शानदार चाचर नृत्य किया, जो देर रात तक चलता रहा। इस दौरान बल्लू
उस्ताद अखाड़ा के युवाओं ने भी चुस्ती-फुर्ती दिखाते हुए लाठी आदि के
माध्यम से अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। इस मौके पर जल विहार समिति
द्वारा सभी लोगों को सम्मानित किया गया।