झांसी। गर्मी ही नहीं, अब सर्दी में भी फंगल इंफेक्शन की मार से लोग परेशान हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लिए बगैर खुद से खरीदकर क्रीम लगाने की वजह से यह मर्ज और बढ़ जाता है। फिर इस बीमारी से ठीक होने में आठ-दस महीने तक का समय लग रहा है। यही नहीं, इलाज के लिए एक लाख तक खर्च हो जा रहे हैं। चूंकि, यह संक्रामक बीमारी भी है, ऐसे में डॉक्टर मरीज के संपर्क में आने से बचने की सलाह दे रहे हैं।
यह एक प्रकार की लाल गोल चकत्ते के साथ होने वाली खुजली है, जिसे आम भाषा में दाद कहा जाता है। फंगस हमारे शरीर की चमड़ी की सतह पर उपस्थित रहता है, जो कि अनुकूल वातावरण जैसे कि गर्मी, नमी, उमस से उत्पन्न पसीने में तीव्र गति से बढ़कर दाद के लक्षण उत्पन्न करता है। यह बाल, नाखून, त्वचा के किसी भी हिस्से में हो सकता है। पैर और नाखून में कसे हुए जूतों व ज्यादा देर पानी में रहने से भी यह रोग हो जाता है। इसके अलावा जांघ में जींस व टाइट, नायलोन, रेशम सेंथेटिक कपड़े पहनने, एक-दूसरे की टोपी, हेलमेट, कंघा इस्तेमाल करने, बॉडी फाल्डस मोटापे की वजह से गर्दन के नीचे, पार्लर में अन हाइजेनिक कैंची, रेजर और टॉवल, ट्रिमर का इस्तेमाल करने से फंगल इंफेक्शन हो जाता है। यह संक्रामक रोग है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, संक्रमित पालतू जानवर के संपर्क में आने, संक्रमित व्यक्ति की वस्तु इस्तेमाल करने से यह रोग फैलता है।
इन बीमारियों के साथ ज्यादा देखा जाता
फंगल इंफेक्शन डायबिटीज, एचआईवी, कुपोषित बच्चे, खून की कमी, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, ज्यादा समय तक अनुचित एंटीबायोटिक, स्टेराइड दवा के सेवन से यह बीमारी ज्यादा देखी जाती है।
मरीज खुद, दूसरों की सलाह, गैर विशेषज्ञ से पूछकर गलत दवा मेडिकल स्टोर से खरीदता है, जिसमें तीन या चार दवाओं का स्टेराइड सहित मिश्रण होेता है। इससे थोड़े समय के लिए आराम जरूर मिलता है लेकिन दाद को विस्फोटक रूप में जन्म देती है। इस तरह का मलहम इस्तेमाल करने के बाद फंगल इंफेक्शन आसानी से कम दवाओं में ठीक नहीं हो पाता है। कई बार चमड़ी कमजोर होकर फट जाती है। ऐसे मरीजों को ठीक करने में आठ से दस महीने और एक लाख रुपये तक का खर्च आ रहा है।
- डॉ. प्रतीक शिवहरे, त्वचा रोग विशेषज्ञ।
ऐसे करें बचाव
- नाखून छोटे रखें।
- कमर, हथेली पर धागा बांधने से बचें।
- संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें।
- कपड़ों को गर्म पानी में धोना व उल्टा सूर्य की रोशनी में सुखाएं।
- सिंथेटिक, नायलॉन, रेशमी, चुस्त, इलास्टिक वाले कपड़े न पहनें।
- बिस्तर, कपड़े, तौलिया, सोफा कवर, चादर नियमित रूप से धोएं।
- रोजाना धुले हुए सूखे, साफ, ढीले, सूती, प्रेस करे हुए कपड़े पहनें।
- सुबह-शाम नहाना के बाद शरीर को अच्छे से तौलिये से पोंछकर कपड़े पहनें।