झांसी। ओपीडी हो या फिर आईपीडी। मरीजों की सर्जरी करने की बात हो या फिर सिजेरियन डिलीवरी की, इनमें से किसी भी एक बिंदु पर झांसी का महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज खरा नहीं उतर पाया है। यूपी के छह पुराने मेडिकल कॉलेजों में झांसी सबसे निचले पायदान पर रहा है। शासन ने भी इस पर नाराजगी जताई है।
शासन ने जनवरी से अगस्त 2022 तक की झांसी, कानपुर, आगरा, मेरठ, गोरखपुर और प्रयागराज के मेडिकल कॉलेजों के प्रदर्शन की समीक्षा की। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बुंदेलखंड के सातों जिलों के अलावा मध्य प्रदेश के दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर समेत कई जिलों के मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। इसके बावजूद पिछले आठ महीने में सबसे कम ओपीडी झांसी मेडिकल कॉलेज की रही।
झांसी की तुलना में प्रयागराज मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में दोगुने और कानपुर में डेढ़ गुने से अधिक मरीज देखे गए। वहीं, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में सिर्फ 3118 मरीज भर्ती (आईपीडी) हुए। जबकि, 401 की सर्जरी और 94 रोगियों की सिजेरियन डिलीवरी हुई। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव ने झांसी के मेडिकल कॉलेज को छठवीं रैंक दी है।
घंटों करना पड़ता इंतजार फिर भी ठीक से नहीं होता इलाज
झांसी। मेडिकल कॉलेज से मरीजों को मोह भंग होने का एक बड़ा कारण डॉक्टरों द्वारा सही से इलाज नहीं करना है। मरीजों के साथ अस्पताल परिसर में स्टाफ सही से व्यवहार भी नहीं करता है। छोटी-छोटी बातों के लिए तीमारदारों को भटकना पड़ता है। कभी तीमारदार खुद ही स्ट्रेचर घसीटते नजर आते हैं तो कभी मरीज को गोद में लिए हुए। यहां तक की काउंटर पर पर्चा बनवाने, ओपीडी में दिखाने से लेकर जांच कराने के लिए घंटों खड़ा रहना पड़ता है। इसलिए भी मरीज मेडिकल कॉलेज आने से कतराते हैं।
ये है स्थिति
मेडिकल कॉलेज ओपीडी आईपीडी सी-सेक्शन सर्जरी रैंक
प्रयागराज 74319 5508 112 2536 1
मेरठ 51776 3827 163 1286 2
आगरा 46815 4298 260 864 3
गोरखपुर 46078 5430 195 835 4
कानपुर 60114 5131 163 583 5
झांसी 36939 3118 94 401 6
कानपुर, प्रयागराज समेत अन्य पांच जिलों की आबादी झांसी से कहीं अधिक है। दूसरी तरफ झांसी मेडिकल कॉलेज के स्टाफ ने भी सही आंकड़ा नहीं भेजा फिर भी जिन विभागों में ओपीडी, आईपीडी और सर्जरी की संख्या कम है उनको नोटिस दिया जाएगा। वेतनवृद्धि भी रोकी जाएगी। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।